मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 12 हजार में से केवल 2 हजार 55 को मिला लाभ

गोपालगंज. सरकार महिलाओं के उत्थान को लेकर एक से बढ़कर एक योजना चला रही है. लेकिन उसका लाभ सीधे लाभुक को नहीं मिल पा रहा है. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का भी यही हाल है. अबतक 12 हजार आवेदकों में से मात्र दो हजार 55 लोगों को इस योजना का लाभ मिल सका है. कागजी कार्यवाही से लेकर बजट आने के इंतजार में तमाम लोगों की उम्मीदें टूट जाती हैं.

विगत पांच वर्षों का आंकड़ा देखा जाय तो गोपालगंज के 14 प्रखंडों में कन्या विवाह योजना के लिए 12 हजार 91 ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं. जिसमें से 1 हजार 943 आवेदनों को तो अस्वीकृत कर दिया. प्रखंड स्तर पर जांच के बाद 2 हजार 135 आवेदनों को स्वीकृति के लिए जिलास्तर पर भेजा गया.

जिला स्तर पर जांच के क्रम में 40 आवेदन पत्र को अस्वीकृत कर दिया. जांच की लंबी प्रक्रिया के बाद दो हजार 55 लोगों को कन्या विवाह योजना के लिए योग्य पाया गया. कागजी प्रक्रिया पूरी करने और राशि के अभाव में सैकड़ों नवविवाहित कन्या से मां बन गईं और अबतक उन्हें राशि नहीं मिली.

कई ऐसे मामले आए हैं कि शादी के करीब पांच साल बीत जाने के बाद भी कन्या विवाह योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को भटकना पड़ रहा है. सैकड़ों नव विवाहित कन्या लाभार्थियों को अभीतक चेक मुहैया नहीं कराया गया.

2017 से अबतक की विवाहिताओं का प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना नियम-सा बन गया है. प्रोत्साहन राशि लेने के लिए उचकागांव प्रखंड के नवकाटोला गांव के चंदिका महतो और हरदेव महतो ने अपनी लड़की की शादी के बाद तीन साल पहले प्रखंड में आवेदन पत्र जमा कराया गया था.

आवेदन देने के बाद उन्हें उसपर क्या कार्रवाई की गई पता नहीं है. इसी तरह राजकुमारी देवी, कविता कुमारी, चांदनी कुमारी ने बताया कि उनकी शादी पिछले 2 वर्ष पूर्व हुई थी. शादी के बाद जुलाई 2016 में उन्होंने रजिस्ट्रेशन कराकर आवेदन आरटीपीएस के माध्यम से जमा किया था. लेकिन अभी तक उन्हें राशि प्राप्त नहीं हो पाई है.

दर्जनों नवविवाहिता लाभुक योजना के चेक का इंतजार करते-करते ससुराल चली गई और मातृत्व सुख प्राप्त करने के बाद सरकारी अस्पताल से मातृत्व लाभ के पैसे की हकदार हो गयी. दर्जनों लाभुक अब बच्चे को गोद लिए कन्या विवाह योजना की राशि पाने की आस छोड़ दी है.

इस संबंध में बाल संरक्षण इकाई सहायक निदेशक आलोक कुमार गौतम ने बताया कि प्रखंड और जिला से जांच के बाद जो भी आवेदन स्वीकृत होते हैं. वे आवेदन समाज कल्याण निदेशालय को भेज दिए जाते हैं. आवेदन में गलती होने पर उन्हें जांच में अस्वीकृत कर दिया जाता है और आवेदक को बताया भी जाता है. लेकिन वे दोबारा कागजात जमा नहीं करते हैं. जिस कारण उनको लाभ नहीं मिल पाता है.

हिन्दुस्थान समाचार/अखिला/सुनील

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