मोहाली में खेले गए एकदिवसीय मैच ने जीवन मे अधिक जिम्मेदार बना दिया : ईशांत शर्मा

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भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा ने अपने साथ मैदान पर घटी एक ऐसी घटना का उल्लेख किया,जिसने गलतियों के प्रति उनके नजरिए को बदल दिया और उन्हें जीवन में एक अधिक जिम्मेदार व्यक्ति बना दिया.

31 वर्षीय ईशांत ने अक्टूबर 2013 में मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय मैच का उल्लेख किया, जिससे कारण उनके दृष्टिकोण में बदलाव आया.इस मैच में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 9 विकेट पर 303 रन बनाए थे.

ऑस्ट्रेलिया को एक समय जीतने के लिए 18 गेंदो पर 44 रन चाहिए थे, धोनी ने गेंद ईशांत को दी,सामने जेम्स फॉल्कनर थे.फॉल्कनर ने ईशांत के इस ओवर में 4 छक्के सहित कुल 30 रन जोड़े और ऑस्ट्रेलिया की जीत सुनिश्चित की.फॉल्कनर इस मैच में 29 गेंदों पर 64 रन बनाकर नाबाद रहे.

ईशांत ने एक खेल वेबसाइट द्वारा आयोजित एक वीडियो चैट में दीप दासगुप्ता को बताया,”मेरे जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2013 में आया।फॉल्कनर ने मोहाली में एकदिवसीय मैच में मेरे एक ओवर में 4 छक्के सहित 30 रन जुटाये और भारत को इस मैच में हार मिली।”

उन्होंने कहा,”उस समय मुझे लगा कि मैंने अपने और अपने देश के साथ विश्वासघात किया है.दो-तीन हफ्तों तक, मैंने किसी से बात नहीं की.मैं बहुत रोया.मैं बहुत सख्त आदमी हूँ.मेरी माँ कहती है कि उन्होंने मेरे जैसा सख्त आदमी नहीं देखा.लेकिन उस दिन मैंने अपनी प्रेमिका को फोन किया और एक बच्चे की तरह फोन पर रोया।”

उन्होंने आगे कहा,”वे तीन सप्ताह एक बुरे सपने की तरह थे.मैंने खाना बंद कर दिया.मैं सो नहीं सका या कुछ और नहीं कर सका.आप टेलीविजन ऑन करते हैं और देखते हैं कि कुछ लोग आपकी आलोचना कर रहे हैं, जो आपको और अधिक परेशान करता है।”

उन्होंने आगे बताया कि उस घटना के बाद उनके लिए चीजें कैसे बदल गईं और लंबे समय में इसका उन्हें क्या फायदा हुआ.उन्होंने कहा,”मैं अब इसके बारे में हँसता हूँ और मैं इसे एक आशीर्वाद की तरह मानता हूँ.कभी-कभी आपको अपने जुनून को समझने के लिए एक झटके की आवश्यकता होती है.फॉल्कनर घटना के बाद, मैं अपने जीवन में बड़े बदलावों से गुजरा।2013 के बाद, मैंने चीजों को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।

उन्होंने आगे कहा,”इससे पहले, अगर मेरा प्रदर्शन खराब होता, तो लोग आते और मुझे कहते कि ‘यह ठीक है, ऐसा होता है।” लेकिन 2013 के बाद, अगर कोई मेरे पास आया और उसने कहा, तो मैं नहीं सुनूंगा.अगर मुझसे कोई गलती हुई है, तो मैं उसे स्वीकारता हूं.मैंने अपने कार्यों की जिम्मेदारी लेनी शुरू कर दी है।”

हिन्दुस्थान समाचार/सुनील