11 साल से पानी में तैरकर बच्चों को पढ़ाने स्कूल जाती है ये महिला टीचर..

नई दिल्ली. कौन कहता है आसमान में सूराख नहीं हो सकता, जरा पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’ ये कहावत ओडिशा की इस महिला टीचर पर बिलकुल सही बैठती है. ओडिसा की ये टीचर आज के समय में एक मिशाल हैं.

बिनोदिनी सामल पेशे से टीचर हैं. ओडिशा की रहने वाली ये महिला शिक्षक पिछले 11 साल से बच्चों को पढ़ाने के लिए रोज नदी पार करके स्कूल पहुंचती हैं.

घर से निकलने के बाद स्कूल तक का सफर जिस तरह पूरा करती हैं, वो उनकी हिम्मत और अपने पेशे के प्रति जुड़ाव की कहानी बयान करता है.

49 साल की बिनोदिनी सामल ढेकनाल जिले के राठीपाला प्राइमरी स्कूल में पढ़ाती हैं. पिछले 11 सालों से स्कूल में पढ़ा रहीं बिनोदिनी ने शायद ही कभी छुट्टी ली हो. बरसात के दिनों में बिनोदिनी स्कूल जाने के लिए सापुआ नदी को पार करना पड़ता है.

उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि पानी से भींगने के कारण तबीयत खराब होने के बावजूद उन्होंने स्कूल आना बंद नहीं करती.

स्कूल में दो शिक्षकों की तैनाती है बिनोदिनी और हेडमास्टर काननबाला मिश्रा. मानसून के दिनों में कई बार स्टूडेंट्स और हेडमास्टर स्कूल नहीं पहुंच पाते, लेकिन बिनोदिनी कभी गैरहाजिर नहीं होतीं. हाल ही में नदी पार करते वक्त विनोदिनी की तस्वीरें वायरल हुई हैं.

हालांकि, ये नदी गर्मी के दिनों में ज्यादातर समय सूखी ही रहती है. जबकि मॉनसून के वक्त इसमें पानी बढ़ जाता है.

इस स्कूल में कुल 53 स्टूडेंट हैं. बिनोदिनी साल 2008 से गणशिक्षक (संविदा शिक्षक) के रूप में काम कर रही हैं. गणशिक्षकों की भर्ती ओडिशा सरकार द्वारा वर्ष 2000 की शुरुआत में की गई थी.

शिक्षक के रूप में उन्हें 7000 रुपये प्रति माह का वेतन मिलता है. जबकि उनका पहला वेतन 1700 रुपये प्रति महीने का था.

बिनोदिनी के मुताबिक, वो हमेशा एक जोड़ी कपड़े और मोबाइल एक प्लास्टिक बैग में रखती है और इसे सिर पर रखकर नदी पार करती हैं। स्कूल पहुंचकर पिंक यूनिफॉर्म पहनती हैं.

बिनोदिनी का कहना है कि मेरे लिए काम किसी भी चीज से ज्यादा मायने रखता है. मैं घर पर बैठकर क्या करूंगी. वो 11 साल से नदी पारकर स्कूल जा रही हैं.

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