दिल्ली मेट्रो में छात्रों, दिव्यांगों और बुजुर्गों को छूट का प्रस्ताव नहीं : केंद्र

नई दिल्ली: दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी(आप) ने महिलाओं को बसों और मेट्रो में मुफ्त यात्रा का शिगूफा छोड़कर छात्रों और बुजुर्गों के बीच भी मेट्रों में रियायती यात्रा की उम्मीद जगा दी है. हालांकि केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि मेट्रो किराये में किसी को छूट देने का उसके पास कोई प्रस्ताव नहीं है.

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली मेट्रो में छात्रों, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागिरकों आदि को रियायत देने संबंधी एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

उन्होंने बताया कि मेट्रो रेल (प्रचालन और अनुरक्षण) अधिनियम,2002 की धारा-33 और 34 के अनुसार, मेट्रो रेल के किराये का निर्धारण किराया निर्धारण समिति (एफएफसी) की ओर से किया जाता है. इस समिति की अध्यक्षता उच्च न्यायालय का मौजूदा न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं.

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि किराये का निर्धारण सरकार नहीं करती. दिल्ली मेट्रो का किराया चौथी एफएफसी की सिफारिशों के आधार पर संशोधित किया गया है. समिति ने छात्रों, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों आदि के लिए किसी भी रियायत की सिफारिश नहीं की है. अधिनियम की धारा-37 के अनुसार, एफएफसी की सिफारिशें बाध्यकारी हैं.

गौरतलब है कि दिल्ली परिवहन निगम(डीटीसी) की बसों में स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों, 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांगों को रियायती पास जारी किया जाता है.

हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/आकाश

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