दिल्ली में निजाम का बेशकीमती हीरा…कीमत जानकर दंग रह जाएंगे आप

नई दिल्ली. दिल्ली के नेशनल म्यूजियम में इन दिनों 18 वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी तक रहे हैदराबाद के निजाम के समय के आभूषणों की प्रदर्शनी लगी हुई है. इस प्रदर्शनी में निजाम से संबंधित 173 सामानों को दिखाया जा रहा है.

विश्व प्रसिद्ध कोहिनुर हीरा का दोगुना है ये हीरा – 19 फरवरी को शुरू हुई जो 5 मई तक चलेगा ये प्रदर्शनी 19 फरवरी को शुरू हुई जो 5 मई तक चलेगा. इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण ‘जैकब’ हीरा है जो आकार में विश्व प्रसिद्ध कोहिनुर हीरा का दोगुना है. इसकी कीमत करीब 900 करोड़ रूपये आंकी जा रही है.

अपनी तेज चमक से लुभाता है जैकब- 39.5 मिलीमीटर लंबा 29.25 मिलीमीटर चौड़ा और 22.5 मिलीमीटर के घेरे वाला 37 ग्राम का जैकब डायमंड अपनी तेज चमक से लोंगो को आकर्षित कर रही है .

नेशनल म्यूजियम के महानिदेशक डॉ बुद्धरश्मि मणि के मुताबिक यह जैकब डायमंड दक्षिण अफ्रीका की किंबरले खान से निकला है. यह हीरा सफेद रंग का है.

ये है रोचक इतिहास –

भारत लाने का श्रेय अलेक्जेंडर मैल्कोन जैकब को- जैकब हीरा करीब 125 वर्ष पहले अफ्रीका की किसी खान में कच्चे रूप में मिला था. वहां से इसे एक व्यवसाय संघ द्वारा एमस्टरडम लाया गया और कटवा कर इसे नया रूप दिया गया. जैकब हीरे को भारत लाने का श्रेय अलेक्जेंडर मैल्कोन जैकब को जाता है.

जैकब रहस्यमयी व्यक्ति था, लेकिन भारतीय राजाओं के विश्वासपात्रों में से एक था. वह इटली में एक रोमन कैथोलिक परिवार में पैदा हुआ था.

नेशनल म्यूजियम में आयोजित निजाम के आभूषणों की प्रदर्शनी के आयोजकों ने बताया कि 1890 में जैकब ने इस हीरे को बेचने की बात छठे निजाम महबूब अली पाशा से की.

उस समय इसका दाम एक करोड़ 20 लाख रुपये आंका गया था, लेकिन इसका सौदा 46 लाख रुपये में तय हुआ. निजाम ने 20 लाख रुपये उसे हीरे को हिन्दुस्तान लाने के लिए दिए, लेकिन बाद में निजाम ने लेने से मना कर दिया.

मुकदमा और सुलह के बाद मिला हीरा- ब्रिटिश लोगों की तरफ से विवाद होने के कारण कलकत्ता (अब कोलकाता) हाई कोर्ट में मुकदमा चला और सुलह के बाद यह हीरा निजाम को मिल गया. महबूब अली पाशा ने जैकब हीरे पर कोई खास ध्यान नहीं दिया.

चोरी से बचाने के लिए रखते थे जूते के अंदर- यह भी कहा जाता है कि हीरे को चोरी होने से बचाने के लिए वह इसे अपनी जूती के अंदर रखते थे. उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे और अंतिम निजाम उस्मान अली खान को जूती के अंदर से यह हीरा मिला और इसे एक पत्थर मानते हुए उन्होंने इसे पेपरवेट की तरह से प्रयोग किया था.

हैदराबाद रियासत भारत के धनी रियासतों में शुमार था. यहां के निजाम अपने शाह खर्ची के लिए जाने जाते थे. निजाम एक दौर में दूनिया के सबसे रईस शख्स रहे हैं. इन आभूषणों की प्रदर्शनी पिछली बार 2007 में लगाई गई थी.

11 साल बाद पून: यह आयोजित की गई है . इस प्रदर्शनी को देखने के लिए 50 रुपये का टिकट लगाया गया है और 500 से 600 लोग रोजाना इनकी खूबसूरती निहारने पहुंच रहे हैं. इसमे देश और विदेश के पर्यटक शामिल हैं.

HS.NEWS/कृष्णा कन्हैया

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