नागपुर में बदजुबानी पर उतरे विरोधी
  • कांग्रेस और विपक्षी पार्टीयो के पास गडकरी और भाजपा के नेताओं पर अभद्र टिप्पणियों के अलावा कुछ शेष नहीं बचा है
  • चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो नागपुर संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है

मनीष कुलकर्णी

जब इन्सान कमजोर, हताश, निराश और कुंठाग्रस्त हो जाता है तब अक्सर गाली-गलौज का सहारा लेता है. 

लोकसभा के चुनावी समर में नागपुर संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतरे बीजेपी के कद्दावर मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ कोई अहम मुद्दा ना मिलने कि वजह से प्रमुख विरोधी पार्टी कांग्रेस खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे कि कहावत को नागपुर में चरितार्थ करती दिख रही है. 

कांग्रेस और विपक्षी पार्टीयो के पास गडकरी और भाजपा के नेताओं पर अभद्र टिप्पणियों के अलावा कुछ शेष नहीं बचा है.

चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो नागपुर संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है. नागपुर से 1952 और 1957 में कांग्रेस की अनुसूया काले, 1962 में बापुजी अणे (निर्दलीय), 1967 में नरेन्द्र देवघरे (कांग्रेस), 1971 और 1980 में जाबुंवंतराव धोटे (कांग्रेस), 1977 में गेव आवारी(कांग्रेस), 1984 और 1989 बनवारीलाल पुरोहित (कांग्रेस), 1996 में बनवारीलाल पुरोहित (भाजपा) ने चुनाव जीता था. 

वहीं 1991 में दत्ता मेघे(कांग्रेस), 1998, 1999, 2004 और 2009 में विलास मुत्तेमवार (कांग्रेस) ने नागपुर से जीत दर्ज की थी. नागपुर संसदीय क्षेत्र में 55 साल कांग्रेस का दबदबा रहा है. 

कांग्रेस के इस गढ़ को 2014 में नितिन गडकरी ने सेंध लगाई. नागपुर से लगातार 4 बार सांसद रहे विलास मुत्तेमवार को गडकरी ने 2 लाख 85 हजार वोटों से पराजित किया था. 

विश्लेषकों की माने तो बीते 5 वर्षो में गडकरी ने अपने गृहजनपद का अच्छा विकास किया है. वही भंडारा के निवासी नाना पटोले को कांग्रेस ने  नागपुर के चुनावी मैदान में ढकेला है. नतीजतन स्थानीय जनता उन्हें बाहरी उम्मीदवार मानती है. 

देश के प्रमुख पदो का संचालन करते हुए हमेशा अपने पैर जमीन पर रखने वाले नितिन गडकरी ने नागपुर के सांसद, मंत्री के रूप में करीब 60 हजार करोड़ रुपये की 24 परियोजनाएं शुरू करायीं हैं.

इसमे नागपुर मेट्रो, आईआईएम, आईआईटी, एम्स, लॉ यूनिवर्सिटी सहित इलाके में बहुत सी औद्योगिक इकाइयां शुरू कराने का श्रेय गडकरी को जाता है. इन योजनाओं से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिला और लोगों के जीवन स्‍तर में सुधार हुआ. 

जातिगत भेदों से ऊपर उठकर लोगों से व्‍यवहार करने वाले नितिन गडकरी की छवि क्षेत्र में बेहतर है. लेकिन विरोधियों ने गडकरी कि जाति को लेकर प्रहार करना शुरू कर दिया है.

पढ़े पूरा लेख युगवार्ता के 14 अप्रैल के अंक में

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