Budget 2019- महिलाओं की महिला वित्त मंत्री से ये स्पेशल मांग

नई दिल्ली.मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश होने जा रहा है. ऐसे में देश के हर तबका टकटकी लगाकर बजट का इंतजार कर रहा है.

इस बजट को देश की पहली महिला वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पेश करने जा रही हैं. ऐसे में महिला वित्तमंत्री के बजट पेश करने के कारण देश की महिलाएं अपने लिए कुछ खास की उम्मीदें लगाकर बैठी हैं, तो आईए जानते हैं इस बजट से महिलाओं की उम्मीदें हैं.

हमेशा की तरह इस बार भी महिलाओं की पहली मांग सरकार से खुद के लिए सुरक्षा की ही है. वैसे तो सरकार इस पर कई कदम उठा चुकी है.लेकिन अभी भी इस पर ठोस कदम उठाए जाने बाकी हैं.

पब्लिक प्लेस पर महिलाओं की सुरक्षा काफी अहम मुद्दा शुरू से ही रहा है.ऐसे में महिलाएं इस पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के काफी उम्मीदें लगाकर बैठी हैं.

लगातार कई सालों से पब्लिक प्लेसेज और पब्लिक ट्रांसपोर्ट्स में आज भी महिलाएं सीसीटीवी कैमरों की मांग कर रही हैं.जो की अभी तक पूरी नहीं हुई है.ऐसे में महिलाओं को पूरी उम्मीद है कि इस बार बजट में इस मांग को पूरा किया जाएगा.

सस्ती हो महिलाओं के लिए शिक्षा-

महिलाओं की दूसरी मांग शिक्षा को लेकर है. महिलाएं अभी भी शिक्षा के मामले में काफी पिछे हैं. आज भी देखा जाता है कि टियर 2 और टियर 3 सिटीज में लड़कियों को आसानी से उच्च शिक्षा नहीं मिल पाती.

वैसे तो इसके पिछे कई कारण हैं. लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण महंगी फीस का होना है. महंगी फीस के कारण पैरेंट्स उनकी लड़कियों को उच्च शिक्षा नहीं दे पाते.ऐसे में महिलाओं को इस बजट से उम्मीदें हैं कि इस बार बजट में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा को सस्ता किया जाएगा.साथ ही उन्हें एजुकेशन लोन के इंटरेस्ट अमाउंट पर, सेक्शन 80E के तहत टैक्स सीमा में भी छूट दी जाएगी.

नौकरीपेशा महिलाओं की उम्मीदें-

नौकरीपेशा महिलाओं ने भी बजट से काफी उम्मीदें लगा रखी हैं. मोदी सरकार ने अपने पिछली सरकार के बजट में नौकरीपेशा महिलाओं को एक नहीं बल्कि कई बड़े-बड़े तोहफे दिए थे. ऐसे में महिलाओं को इस बजट से ऐसे ही बड़े तोहफों की उम्मीद एक बार फिर है.

मोदी सरकार के पिछली सरकार के बजट में नौकरीपेशा महिलाओं की पीएफ मदद को पहले तीन साल आठ फीसद करने का फैसला किया था. इससे कामकाजी महिलाओं की इन हैंड सैलरी बढ़ गई थी.

महिलाओं की मांग है कि इस बजट में कामकाजी महिलाओं की आयकर सीमा भी बढ़ाई जाए वहीं, 26 हफ्तों के मातृत्व अवकाश से महिलाओं को काफी वित्तीय मदद मिली है. साथ ही वे इससे काम में भागीदारी के लिए भी सशक्त हुई हैं.

सस्ते में दिया जाए लोन-

कारोबार करने में पुरूषों के मुकाबले महिलाएं काफी पीछे हैं. ऐसे में इस बजट में महिलाएं की मांग है कि उनके लिए बिजनेस शुरू करना सरकारा आसान बनाएं.ऐसे में महिलाओं की इस मांग को देखते हुए सरकार इस बार नया कारोबार शुरू करने के लिए सस्ते ब्याज पर ऋण को लेकर अहम फैसला ले सकती है.

अभी प्रधानमंत्री की मुद्रा योजना का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं ने ही उठाया है. इस योजना की 70 फीसदी से ज्यादा लाभार्थी महिलाएं ही हैं, इन्हें अपना खुद का कारोबार शुरू करने के लिए जमानत-मुक्त कर्ज प्राप्त हो रहा है.

ये है आखिरी मांग-

इसी के साथ महिलाओं की आखिरी मांग है कि महिलाओं की इस्तेमाल की जरूरीं चीजों पर टैक्स कम को या तो खत्म किया जाए.या फिर उस पर से टैक्स न के बराबर लगाया जाए. साथ ही सोने के आभूषण, ब्रेंडेड कपड़ों, ग्रोसरी और कॉस्मेटिक चीजों की कीमतों में हर महिला कटौती चाहती है.

महिलाओं की महिला वित्त मंत्री से ये स्पेशल मांग आपको बता दें कि एक फरवरी 2019 को पेश हुए अंतरिम बजट में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए 1,330 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. जो कि पिछले साल की तुलना में 174 करोड़ रुपये ज्यादा था.अब मांग की जा रही है कि महिलाओं की सुरक्षा डिमांड के हिसाब से इस राशि को बढ़ाया जाए.

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