नई शिक्षा नीति कैसी हो?

अमित लोकप्रिय

बीजेपी नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार नई शिक्षा नीति का प्रारूप लेकर सामने आई है. इसे के कस्तूरीरंगन समिति ने बनाया है. 

इसमें पूर्व प्राथमिक (प्ले स्कूल) से लेकर 12th तक की शिक्षा को अनिवार्य शिक्षा के दायरे में लाने, मातृभाषा में 5th तक शिक्षा प्रदान करने, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने, शिक्षक छात्र अनुपात 1: 30 करने, मिड डे मील में नाश्ता शामिल करने, रेमेडियल शिक्षण पर जोर देने, पुस्तकालयों की जरूरत को समझने, पहली और दूसरी कक्षा में भाषा और गणित पर काम करने, विषयवस्तु का बोझ घटाने, शिक्षण में तकनीकी सहायता पर बल देने (डिजिटलाइजेशन) इत्यादि कई अहम बातें हैं. 

प्रारूप के त्रिभाषा फार्मूले को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों खासकर तमिलनाडू में हिन्दी की अनिवार्यता को लेकर पुरजोर विरोध हुआ. भाषा सम्बंधी विवाद से तमिलनाडू का पुराना इतिहास रहा है. 

पुन: इसके उग्र होने की संभावना को देखते हुए मोदी सरकार ने भाषा संबंधी अपने प्रस्ताव को लचीला और सर्वग्राह्य बनाने का आश्वासन तमिलनाडू को दिया है. 

साथ ही आमजन से नई शिक्षा नीति के प्रारूप सम्बंधी प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं. सुझाव कुछ इस प्रकार हो सकते हैं- मिड डे मील की जिम्मेवारी से प्रधानाध्यापक को मुक्त किया जाए ताकि उनका पूरा ध्यान पढाई पर हो. 

एक प्रखंड के सभी सरकारी विद्यालयों के लिए भोजन सामग्री खरीदने, खाना बनाने और उसे स्कूल तक पहुंचाने और जूठे बरतन उठाने की जिम्मेवारी एक अलग एजेंसी को दी जाए. 

इससे मानटिरिंग भी आसान होगी. दूसरी बात कि स्कूल शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी, जनगणना, पशुगणना, प्रचार-अभियान जैसे गैर शैक्षिक गतिविधियों से अलग किया जाए. 

देहातों में मानसिक बीमारियों को लेकर कोई जागरुकता नहीं होती जिससे यह रोग भयावह रूप ले लेता है. अत: कक्षा सात से बच्चों की नियमित काउंसेलिंग हो. 

साथ ही हर बच्चे का हेल्थ कार्ड बने. अभी मौजूद सरकारी डाक्टरों से यदि काम न चले तब हर ब्लाक में कम से कम 3 काउंसिलर नियुक्त कर उनके बीच विद्यालय बांट दिये जाएं. 

बदलते माहौल में स्वस्थ रहना एक कठिन चुनौती बन गई है. अत: हाई स्कूल स्तर की शिक्षा में हेल्थ एवं वेलनेस का कोर्स भी अनिवार्य किया जाए.

पूरा लेख पढ़ें युगवार्ता के 23 जून के अंक में…

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