अब सोमवार को होगा नेपाल के पीएम ओली की किस्मत का फैसला, कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक टली

नई दिल्ली. नेपाल में सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की अहम स्थायी समिति की बैठक टल गई है. इसमें नेपाली पीएम के पी शर्मा ओली के भाग्य का फैसला होना था. बैठक सोमवार तक के लिए टल गई है क्योंकि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को और अधिक समय चाहिए.    

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से नहीं मिलने पहुंचे हैं. इसी के साथ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विभाजन की ओर बढ़ती दिख रही है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है.

दोनों ही नेताओं पर यह दबाव है कि वो पार्टी में किसी तरह की टूट न होने दें. पार्टी के कई सीनियर लीडर चाहते हैं कि इस मसले का हल आपसी सहमति से निकाला जाए.

पीएम ओली द्वारा भारत के खिलाफ दिए गए बयान के बाद से ही उन्हें नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (Nepal Communist Party) के वरिष्ठ नेता गैर-जिम्मेदार बता रहे हैं. पार्टी के बड़े और छोटे नेताओं द्वारा उनसे लगातार इस्तीफे की मांग की जा रही है.

नेपाली मीडिया (Nepali Media) की रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री ओली (Prime Minister Oli) और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने 3 जुलाई यानी शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास में बैठक की. ये बैठक कई घंटों तक चली.

इस बैठक में दोनों ही टॉप लीडर के बीच मध्यस्तता कराने की कोशिश हुई और दोनों को एक-दूसरे पर भरोसा रखने को कहा गया. इस बैठक के बाद प्रचंड नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मिलने गए. इसके बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री ओली की कुर्सी जा सकती है.

काठमांडू पोस्ट अखबार के मुताबिक, ओली ने बड़े नेताओं से मुलाकात की और सहयोग मांगा. इनमें से कुछ नेताओं के तो वे ऑफिस या घर तक पहुंच गए.

एनसीपी के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को पीएम ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनकी हालिया भारत विरोधी टिप्पणी ‘‘ना तो राजनीतिक रूप से सही है और ना कूटनीतिक रूप से उपयुक्त है. तब प्रचंड ने कहा था, ‘पीएम की ये टिप्पणी कि भारत उन्हें अपदस्थ करने की साजिश रच रहा है, ना तो राजनीतिक रूप से सही है और ना कूटनीतिक रूप से उपयुक्त है.

वहीं बुधवार को प्रचंड की अध्यक्षता में पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में 44 में से 33 सदस्यों ने ओली के इस्तीफे की मांग की थी. इसके बाद गुरुवार को ओली के इस्तीफे पर सहमति नहीं होने पर समिति की बैठक टाल दी गई थी.अब पार्टी के टूटने का खतरा भी मंडरा रहा है. अब सोमवार को ओली की कुर्सी पर फैसला होगा.

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