अयोध्या पर ओली के विवादित बयान के बाद अब नेपाल सरकार ने दी सफाई

अयोध्या और भगवान राम के बारे में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) के विवादास्पद बयान के बाद नेपाल सरकार ने सफाई दी. नेपाली सरकार ने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.

भारत और नेपाल के पुराने सांस्कृतिक संबंधों हवाला देते हुए इस बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री अयोध्या के पुरातात्विक और पौराणिक महत्व को किसी भी रूप में कम करना नहीं चाहते बल्कि रामायण के भौगोलिक विस्तार पर अध्ययन को बढ़ावा देना चाहते हैं.

प्रधानमंत्री के बयान पर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई टिप्पणी किसी भी राजनीतिक विषय से जुड़ी नहीं है और उनका किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. श्री राम और उनके साथ जुड़े स्थानों के बारे में कई मिथक और संदर्भ हैं.

प्रधानमंत्री रामायण से जुड़े विशाल सांस्कृतिक फैलाव के आगे के अध्ययन और शोध के महत्व पर प्रकाश डाल रहे थे. इससे श्री राम, रामायण और समृद्ध सभ्यता से जुड़ी हुई जगहें के बारे में विभिन्न तथ्यों को अधिक जाना जा सके . साथ ही यह टिप्पणी अयोध्या के महत्व कम करने और उसके सांस्कृतिक मूल्यों पर बहस करने के लिए नहीं थी.

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि अयोध्या(भारत) से जनकपुर (नेपाल) में आने वाली विवाह पंचमी को हर साल मनाने की परंपरा है. नेपाल और भारत के प्रधानमंत्रियों ने मई 2018 में रामायण सर्किट का शुभारंभ किया और जनकपुर-अयोध्या यात्री बस सेवा इसका एक महत्वपूर्ण घटक है. ये तथ्य हमारे दोनों देशों और लोगों के बीच समय के साथ प्रगाढ़ होते सांस्कृतिक संबंधों को इंगित करते हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इतिहास की नई व्याख्या करते हुए सोमवार को कहा था कि प्राचीन अयोध्या नेपाल में थी और और भगवान राम यहीं पैदा हुए थे. काठमांडू में अपने आवास पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि नेपाल के बीरगंज के पश्चिम में अयोध्या नाम से पुराना गांव है. यहीं पर वाल्मीकि आश्रम था. महाराज दशरथ ने इसी गांव में संतानोत्पत्ति के लिए यज्ञ कराया था. साथ ही उन्होंने पूछा कि ऐसे में अयोध्या भारत में कैसे हो सकती है और राम भारतीय कैसे हो सकते हैं?

हिन्दुस्थान समाचार/अनूप

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