भारत का लक्ष्य 2028 ओलिंपिक खेलों के टॉप-10 में जगह बनाना : राष्ट्रपति

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नई दिल्ली, 29 अगस्त (हि.स.). राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को पहली बार वर्चुअल माध्यम से राष्ट्रीय खेल एवं साहसिक पुरस्कार-2020 प्रदान करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य 2028 ओलिंपिक खेलों के शीर्ष 10 में जगह बनाना है.उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सबकी भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत एक खेल महाशक्ति के रूप में उभरेगा.

राष्ट्रपति कोविंद ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद, खिलाड़ियों के साथ-साथ अन्य सभी देशवासियों के लिए भी एक आदर्श हैं. यूरोप में गांधीजी के बाद मेजर ध्यानचंद सबसे चर्चित व्यक्ति थे. उन्होंने साधारण परिवेश तथा सुविधाओं के बीच अपनी निष्ठा व कौशल से हॉकी के मैदान में असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं.

मेजर ध्यानचंद से लेकर आज के पुरस्कार विजेताओं और प्रशिक्षकों के प्रयासों के बल पर विश्व पटल पर भारत का गौरव बढ़ता रहा है. राष्ट्रपति ने कहा कि खेल और खिलाड़ी देश में एकजुटता की भावना को मजबूत करते हैं. इसी के चलते देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहने वाले खिलाड़ी के विजय का जश्न केरल और लक्षद्वीप तक मनाया जाता है. जब तमिलनाडु का खिलाड़ी पदक जीतता है तो लद्दाख तक सभी देशवासियों में खुशी की लहर दौड़ जाती है.

उन्होंने पुरस्कार विजेताओं में महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों को विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि खेल-रत्न पुरस्कार पाने वाले पांच खिलाड़ियों में तीन बेटियां– मनिका बत्रा, विनेश और रानी तथा एक पैरा-एथलीट शामिल हैं.

राष्ट्रपति ने भारत के पारंपरिक खेलों- कबड्डी, खो-खो और मल्लखंब की बढ़ती लोकप्रियता को सुखद बदलाव बताते हुए कहा कि यह जन-सामान्य को खेलों से जोड़ने में सहायक होगी. उन्होंने कहा कि आज क्रिकेट और फुटबॉल के अलावा वॉलीबॉल और कबड्डी जैसे खेलों के लीग टूर्नामेंट लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने पुरस्कार विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आप सबने यह सिद्ध किया है कि इच्छा, लगन और मेहनत के बल पर सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है.

राष्ट्रपति ने कहा कि खिलाड़ियों के पुरस्कार पाने का समाचार तो बहुत से लोगों को पता चल जाता है लेकिन उनके परिश्रम, संघर्ष तथा आशा-निराशा के अच्छे-बुरे अनुभवों को बहुत कम लोग ही समझ पाते हैं. कोविंद ने कहा कि खेलों में उत्कृष्टता और उपलब्धियां केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है. हर वर्ग तथा क्षेत्र के लोगों की भागीदारी से ही खेल की संस्कृति को बढ़ावा मिल सकता है. यह अच्छी बात है कि स्पोर्ट्स और फिटनेस अब युवाओं की सोच और दिनचर्या का हिस्सा बन रहे हैं. साथ ही, माता-पिता-अभिभावक तथा शिक्षक भी खेल-कूद के प्रति अपना नजरिया बदल रहे हैं. अब वे खेल-कूद को व्यक्तित्व और प्रतिभा के विकास में सहायक मानने लगे हैं.

कोविंद ने कहा, कोविड-19 के कारण खेल जगत पर भी बहुत अधिक असर पड़ा है. पहली बार ओलम्पिक खेल स्थगित किए गए हैं. हमारे देश में भी खेल-कूद की सभी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खेल जगत के लोग और भी अधिक मानसिक शक्ति के साथ इस परीक्षा से बाहर आएंगे और उपलब्धियों के नए इतिहास रचेंगे.

हिन्दुस्थान समाचार/सुशील/बच्चन