प्रियंका की सक्रियता पर नजर

Priyanka Gandhi | Samachar In Hindi
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देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में लगभग तीन दशक से वनवास झेल रही कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी के लिए येनकेन प्रकारेण तैयार होना चाहती है.यही कारण है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले वर्ष से प्रदेश में खासी सक्रिय हैं.

राज्य ब्यूरो

लोकसभा चुनाव के बाद प्रियंका गांधी लगभग दर्जन भर बार उत्तर प्रदेश आ चुकी हैं.प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उन्होंने अपना एक अस्थायी आवास भी बना लिया है.उम्भा नरसंहार, उन्नाव दुष्कर्म कांड, सी.ए.ए. का मुद्दा हो प्रियंका धरना, प्रदर्शन में सक्रियता बनाए हुए हैं. उत्साहित करने के लिए वह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से भी संवाद स्थापित कर रही हैं.नववर्ष के अवसर पर भी प्रियंका ने प्रदेश के कार्यकर्ताओं और कुछ विशिष्ट जन को बधाई संदेश भेजा.नये साल के इन बधाई संदेशों की विशेषता यह है कि एक तरफ भारतीय संविधान की प्रस्तावना छपी है, तो दूसरी तरफ शुभकामना संदेश.

प्रियंका के संदेश कुछ विशिष्ट तरह के लोगों तक जरूर पहुंचे.असल में, प्रदेश में लंबे समय से हाशिए पर चली गयी कांगे्रस एक बार पुन दलित, मुस्लिम मतदाताओं के सहारे सत्ता में वापसी की तैयारी कर रही है.लंबे समय तक इस वोट बैंक के सहारे सत्ता में रही कांग्रेस फिर से पुराने रास्ते पर चलने को तैयार हो रही है.बीच में प्रदेश में सपा-बसपा से पार्टी ने जब-जब गठबंधन किया, उसका ग्राफ नीचे गिरा.कांग्रेस के नेताओं को अब इस भूूल का अहसास हो रहा है.इसलिए 2022 में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं को अकेले मैदान में उतरने का संकेत भी प्रियंका दे रहीं हैं.प्रियंका महिलाओं और पीड़ितों की आवाज बनने का संकल्प भी दोहरा रहीं हैं.वे कहती हैं कि मजदूर, किसान, छात्र, महिला सब परेशान हैं.हम उनकी समस्या हल नहीं कर सकते लेकिन उनकी आवाज बन सकती हैं.

कांग्रेस सभी वर्गो को साधने के साथ ही अपने मूल ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में खड़ा करने की रणनीति के तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी को तबज्जो दे रही है.आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश विधानमंडल दल का नेता भी बनाया गया है.मुस्लिम दलित वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए प्रियंका नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कर रहे लोंगो से मिलने भी गयीं.जबकि प्रदेश प्रशासन द्वारा ऐेसे लोंगो को हिंसा का जिम्मेदार मानते हुए उन्हें कानूनी धाराओं में जेल में निरूद्ध किया गया. इधर, कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी को जबसे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है तभी से वह बसपा सुप्रीमो मायावती के निशाने पर हैं.

प्रियंका जिस तरह प्रदेश के दलितों को अपने पाले में लाने की योजना के तहत मायावती के बजाय भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर को महत्व दे रही हैं, इससे भी मायावती खिन्न हैं.मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस पार्टी द्वारा बसपा विधायकों को अपने पाले में खड़ा करने से भी यह खटास पैदा हुई.मायावती कहती हैं, कि कांग्रेस ने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों का सही संवैधानिक संरक्षण किया होता तो उसे आज यह दिन नहीं देखना होता

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 15 -31 जनवरी के अंक में…