झारखंड- हिन्दु महिला के पार्थिव शरीर को मिला मुस्लिम युवको का कंधा

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गिरिडीह, 07 जून (हि.स.) कोरोना काल में गिरिडीह के मुस्लिम युवकों ने गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहतरीन मिसाल कायम की. रविवार को 72 वृर्षीय वृद्धा लखिया देवी की मौत होने के बाद उसके समाज के लोगों ने कोरोना महामारी से भयभीत हो कर अर्थी को कंधा देने से इंकार कर दिया था.

जिसके बाद पहाड़ीडीह के मुस्लिम समुदाय के करीब 40-50 युवक आगे आए और वृद्धा लखिया देवी के बेटे जागेशवर तूरी और पोते समेत परिवार के कुछ सदस्यों के साथ मुस्लिम नौजवानों ने अर्थी को लेकर आठ किमी दूर स्थित भोरणडीहा मुक्तिधाम पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाया. जो मृतका के परिजनों के लिए संभव नहीं था.

वृद्धा हिन्दु महिला को पार्थिव शरीर को कंधा देने के लिए बरवाडीह के मो. श्मेसर आलम, मो. राजन. मो. राज. मो. बिलाल उर्फ गुड्डन. मो. ताहिद और सलामत समेत कई युवक शामिल थे. जो पूरे हिंदु रीति-रिवाज के अनुसार सजे अर्थी को कंधा देने पहुंचे और वृद्धा के पार्थिव शरीर को दोपहर कड़ी धूप में कंधा देते हुए भोरणडीहा मुक्तिधाम पहुंचाया. इतना ही नहीं मृत वृद्धा के परिजनों समेत मुस्लिम युवा भी अंतिम संस्कार के वक्त बोले जाने वाले शब्द उच्चारण करते हुए चल रहे थे.

40_-50 की संख्या में मुस्लिम युवाओं को एक हिंदु की अर्थी को कंधा देने की यह घटना गिरिडीह का विषय बना हुआ है . इस अंतिम संस्कार यात्रा के दौरान मुस्लिम युवाओं को कंधा देते और शब्दों को उच्चारण करते देख उस रास्ते के लोगों ने काफी हैरानी जताया. इधर भोरणडीहा मुक्तिधाम में मृतक वृद्धा के बेटे जागेशवर तूरी ने पूरे रीति-रिवाज के अनुसार मां को मुखाग्नि दिया.

कोरोना के शुरूआती दिनों में एक ओर जहां देश के कई हिस्सों में मुस्लमानों के प्रति नफरत का माहौल देखने को मिला वहीं इसी कोरोना काल में गिरिडीह के मुसमलानों ने वृद्ध हिंदू महिला के पार्थिव शरीर को कंधा देकर हिन्दु-मस्लिम एकता , भाईचारे , प्रेम और करूणा का एक बेहतरीन मिसाल पेश की है.

हिंदुस्थान समाचार/कमलनयन / सबा एकबाल