बांग्लादेश की लड़कियों के लिए ऐतिहासिक दिन, अपनी वर्जिनिटी ज़ाहिर करने की ज़रूरत नहीं

5 साल की लंबी लड़ाई के बाद आज बांग्लादेश की लड़कियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है. बांग्लादेश की हाई कोर्ट ने ये फैसला लिया है कि अब महिलाओं को मैरिज रजिस्ट्रेशन फॉर्म पर अपनी वर्जिनिटी ज़ाहिर करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

दरअसल हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि मैरिज रजिस्ट्रेशन पर दिए गए विकल्पों में मौजूद ‘कुमारी’ शब्द को ‘अविवाहित’ शब्द से बदल दिया जाए. हालांकि ‘तलाक़शुदा’ और ‘विधवा’ शब्दों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इस साल अक्टूबर के महीने तक कोर्ट पूरा फैसला पब्लिश कर सकता है. उसके बाद सर्टिफिकेट के ऑप्शन्स में बदलाव किया जाएगा.

वहीं आदमियों को भी अब शादी के सर्टिफिकेट में अनमैरिड, विधुर या तलाकशुदा होने की जानकारी देनी होगी.

बता दें कि बांग्लादेश मुस्लिम विवाह और तलाक कानून के तहत, शादी के सर्टिफिकेट में लड़की के सामने तीन ऑप्शन्स होते हैं- वर्जिन (कुमारी), विधवा या तलाकशुदा. शादी के लिए लड़की को इन ऑप्शन्स में से कोई एक चुनना होता है.

इस केस के वकील अय्युन नाहर सिद्दीक़ा ने खुशी जहिर करते हुए कहा, “ये एक ऐतिहासिक फ़ैसला है. उम्मीद है कि ये फ़ैसला बांग्लादेश की महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा.”

साल 1961 में हुई थी इसकी शुरुआत

साल 1961 में शादी के सर्टिफिकेट में ये ऑप्शन्स जोड़े गए थे. उसके बाद से ही बहुत सारे ग्रुप्स इसका विरोध करते आ रहे थे. लोगों का कहना था कि ‘वर्जिन’ शब्द औरत की निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है. साल 2014 में इसे चैलेंज किया गया था.

बांग्लादेश में लड़कियों के हालात

बांग्लादेश में कई लड़कियों की छोटी उम्र में ही शादी कर दी जाती है. कई बांग्लादेशी लड़कियां मानव तस्करी का शिकार होती हैं.

अप्रैल में भी 19 साल की नुसरत जहां रफ़ी को उनके इस्लामिक स्कूल की छत पर मिट्टी का तेल डालकर कुछ लोगों ने आग लगा दी थी. घटना से कुछ दिन पहले ही नुसरत ने अपने साथ हुई यौन हिंसा को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. इस आरोप में स्कूल के प्रधानाचार्य सिराज उद दौला मुख्य आरोपी हैं. उनके अलावा 15 अन्य लोगों पर भी मामला दर्ज किया गया है.

इसके बाद से देश में यौन हिंसा और यौन हिंसा के पीड़ितों की स्थिति पर भी बहस शुरू हो गई थी.

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