महिंद्रा समृद्धि पुरस्कार से सम्मानित मशरूम लेडी अनिमा मजूमदार ने सिखाया महिलाओं को एग्रीबिजनेस का तरीका

एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाली अनिमा मजूमदार ने कभी भी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें इस तरह का कोई सम्मान मिलेगा या फिर उनके जानने-पहचानने वाले लोग उन्हें ‘मशरूम लेडी’ के नाम से पुकारेंगे.

आज से चार साल पहले तो उनके पास अपनी बेटी की फीस के लिए भी पैसे नहीं थे, उनके पति एक सीमांत किसान है जिनके पास 1 एकड़ से भी कम जमीन है. लेकिन फिर मशरूम फार्मिंग पर एक ट्रेनिंग ने सब कुछ बदल दिया.

हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल में उत्तर दीनाजपुर जिले के चोपरा ब्लॉक के एक छोटे से गाँव, दंधुगछ की रहने वाली अनिमा मजूमदार की जिनको मशरूम की खेती के क्षेत्र में योगदान और सफलता के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ फार्म वुमन अवार्ड ऑफ इंडिया यानी “महिंद्रा समृद्धि पुरस्कार – 2019” से सम्मानित किया गया है. अनिमा को यह सम्मान मशरूम की अच्छी खेती और प्रोसेसिंग करके मशरूम के उम्दा प्रोडक्ट्स बनाने के लिए मिला है.

कभी दिन में दो वक़्त की रोटी के लिए भी परेशान रहने वाली अनिमा एक दिन उत्तर दिनाजपुर के कृषि विज्ञान केंद्र गईं. वहां उसकी मुलाकात उत्तर बंग कृषि विश्व विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान की विशेषज्ञ की डॉ. अंजलि शर्मा से हुई. डॉ. शर्मा के सुझाव पर अनिमा ने मशरूम की खेती का प्रशिक्षण लेना शुरू किया.

कुछ दिनों के प्रशिक्षण के उपरांत ही वह मशरूम की खेती के वैज्ञानिक गुर सिख लिए. उसके बाद उसे कृषि विज्ञान केंद्र के बायो-इनपुट प्रयोगशाला में भी मशरूम स्पॉन उत्पादन पर उन्नत प्रशिक्षण लेने के लिए भेजा गया.उसने मशरूम के मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण भी सफलता पूर्वक पूरा किया.

प्रशिक्षण के दौरान अनिमा ने  मशरूम से विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थ तैयार करने की विधिवत जानकारी हासिल की. उसने मशरूम से अचार तैयार करन से लेकर दलेर बोरी (पल्स चंक) और  मशरूम का पापड़ आदि तैयार करना सीख लिया.

अनिमा आज महीने के लगभग 30,000 रुपये कमा रहीं हैं. उनकी यह तरक्की न सिर्फ़ उनके अपने लिए बल्कि उनके इलाके में बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गयी है. उनके बाद से गाँव में और भी लोगों ने मशरूम की खेती करना शुरू किया है.

डॉक्टर अंजली शर्मा ने इन सभी किसानों को FSSI सर्टिफिकेट भी दिलाया ताकि उनके प्रोडक्ट्स बिना किसी परेशानी के बाज़ारों में जा सकें. इसके अलावा, वे शहर के कुछ सुपरमार्केट से भी इन किसानों को जोड़ने की कोशिश में हैं. डॉ. शर्मा ने बताया कि उन्होंने अब तक 400 से भी ज़्यादा किसानों को ट्रेनिंग दी है.

जैसे-जैसे मशरूम प्रोसेसिंग में उनके पास किसानों की संख्या बढ़ेगी तो वे एक ‘फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ भी शुरू करवाना चाहती हैं. अनिमा मजूमदार की सीखने की ललक और मेहनती स्वभाव के चलते उनकी सफलता को देखते हुए ही डॉ. शर्मा ने महिंद्रा समृद्धि सम्मान के लिए उनका नाम भेजा. इस सम्मान के साथ अनिमा को 21 हजार रुपये का इनाम भी मिला, जो बेशक किसी भी किसान परिवार के लिए बहुत बड़ी बात है.

अभावों में जीना कोई अभिशाप नहीं है. लेकिन अभावों में रहकर जिंदगी से कोई सबक नहीं लेना अभिशाप से कम नहीं है. मजूमदार ने मशरूम की खेती में नई उपलब्धि हासिल की है.आस-पास के क्षेत्रों में उसे मशरूप लेडी के रूप में जाना जाता है.

हालांकि सफलता के इस शिखर पर पहुंचना उतना आसान नहीं था. इसके लिए अनिमा को काफी संघर्ष और मेहनत भी करनी पड़ी. दुख और कष्ट भी उठाने पड़े. लेकिन आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का जुनून उसके अंदर हमेशा उफान मारता रहा. इसलिए वह कभी हताश नहीं हुई.

अनिमा मजुमदार और उनके पति  एकड़ जमीन वाले सीमांत किसान हैं. जमीन ही आय का एकमात्र जरिया थी. इसलिए शुरूआत में उन्हें अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा.

हिंदुस्थान समाचार/कर्मवीर सिंह तोमर

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