होटलों से बचे साबुन को RECYCLE कर बच्चों को बांटता है ये NGO

भारत में करीब 70 मिलियन लोग ऐसे हैं जो आज भी साबुन के बारे में कुछ नहीं जानते हैं. पैसों की कमी के चलते उनके लिए साबुन का इस्तेमाल करना एक बड़ी बात होती है. वहीं दूसरी ओर हम और आप जैसे कई लोग हैं जिन्हें साबुन की कद्र नहीं होती है. थोड़े से इस्तेमाल के बाद हम साबुन को ऐसे ही फेंक देते हैं.

इसी को लेकर 25 साल की अमेरिकी महिला एरिन ज़ैकिस ने एक नई मुहिम की शुरुआत की. एरिन ने सुंदरा नाम से मुंबई के बाहरी इलाके कलवा में एक एनजीओ की नींव डाली. ये NGO बड़े बड़े होटलों में जो साबुन बच जाते हैं उसे इकट्ठा करके रीसाइकिल करता है और उसे जरूरतमंद बच्चों में बांटता है.

सुन्दरा के पास 6 फुल टाइम सोप रिसाइकलर्स हैं और बीस पार्ट टाइम हेल्थ टीचर्स हैं. सुंदरा मुंबई में 4,000 से अधिक बच्चों और उनके परिवारों को साबुन और हाइजीन का प्रशिक्षण देता है. साथ ही ये साबुन गुजरात के भी कई इलाकों में जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया जाता है. इस एनजीओ में काम करने वाली गरीब महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार का एक अवसर मिला है.

हिल्टन होटल और सुंदरा एनजीओ के बीच एक सोप रिसाइक्लिंग पार्टनरशिप शुरू हुई थी जिसके तहत हिल्टन अपने होटलों से उपयोग के बाद बचे साबुन सुंदरा को दे देता है और सुंदरा इसे रिसाइकल कर वंचित समुदायों में बांटता है. भारत में हिल्टन के नौ होटल हैं, जो नियमित तौर पर साबुन एकत्रित करके उन्हें डोनेट करते हैं.

एरिन आज खुश हैं की उनके प्रयास से कुछ जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं और बच्चों को सेहत.

World Health Organization के मुताबिक हर साल करीब 20 लाख बच्चों की हाईजीन सम्बंधित बीमारियों के कारण मौत हो जाती है. ऐसे में सुन्दर फाउंडेशन की कोशिशें हजारों बच्चों की सेहत को बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है.

%d bloggers like this: