रीमिक्स की वैसाखी पर टिकी फिल्में

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करीब डेढ़ दशक पहले पचास-साठ के दशक के फिल्मी गीतों का रीमिक्स वर्जन बनाने का सिलसिला चला. इनमें बोल वही रख कर संगीत के साथ छेड़छाड़ की गई. इस तरह के रीमिक्स गीत कुछ हद तक पसंद भी किए गए. पुराने गीतों को टीवी सीरियल में इस्तेमाल करने की होड़ भी एक समय चली. फिल्म ‘दिल विल प्यार व्यार’ में राहुल देव बर्मन के संगीतबद्ध किए गए गीत रखे गए.

श्रीशचंद्र मिश्र

पिछला करीब डेढ़ दशक फिल्मी संगीत में एक अलग तरह का बदलाव वाला रहा है. इस बीच एक नई भेड़चाल शुरू हो गई है. लगभग हर फिल्म में पुराने गीतों को नए अंदाज में संगीतबद्ध करके इस्तेमाल किया जा रहा है. यह फिल्मी संगीत में मौलिकता का अभाव है. वैसाखियों पर टिके रहने की मानसिकता विषय या प्रस्तुतीकरण में दोहराव तो फिल्मों में हमेशा होता रहा है. अब गीत दोहराए जा रहे हैं. गैर फिल्मी गीत भी इस अंधाधुंध नकल से नहीं बच पा रहे हैं. रीमिक्स के इस प्रयोग से पुरानी फिल्मों के गीतों की याद तो ताजा हो जाती है लेकिन उन गीतों की मधुरता व सौंदर्यात्मकता का जो सत्यानाश हो रहा है, वह सबसे ज्यादा दुखद है. आशा भोंसले समेत फिल्म संगीत से जुड़े कई दिग्गज इस मिलावट से आहत हैं. लेकिन तकाजा व्यावसायिकता का है. उसके लिए फिल्म उद्योग किसी भी हद तक जाने को हमेशा तत्पर रहता आया है. मूल समस्या संगीत में प्रयोग के अभाव की है. संगीत में मैलेडी गायब हो गई है, शोर बढ़ गया है. ऐसे में अच्छे गीतों की रचना नहीं हो पा रही है. साल भर में मुश्किल से दस बारह गीत ही ऐसे आ पाते हैं, जिनमें काव्यात्मकता हो और जो बारबार सुनने को बाध्य करें. फिल्मी गीतों की उम्र सीमा लगातार सिकुड़ती जा रही है.

रीमिक्स गीत भी स्थायी पहचान नहीं बना पा रहे हैं. संभव भी नहीं है. मूल गीत की मधुरता और उसे फिल्माने की सिचुएशन में तालमेल का अभाव हर फिल्म में दिखता है. एक फैशन हो गया है आइटम नंबर का और उसी तरह पुराने गीत को रीमिक्स कर इस्तेमाल करने की फिल्मकारों ने अनिवार्यता पाल ली है. ऐसा नहीं है कि रीमिक्स गीत फिल्म को सौ फीसद सफलता दिला दे.

सालों पहले आई फिल्म ‘मोहरा’का गीत ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’अपना लेने के बावजूद ‘मशीन’ ने बाक्स आॅफिस पर पानी नहीं मांगा. ‘कुर्बानी’ के गीत ‘लैला ओ लैला’ ने अपने जमाने में जो जलवा बिखेरा था, वैसा रंग ‘रईस’ में उसका दोहराव सनी लियोनी की मौजूदगी के बावजूद नहीं जम पाया. पुराने हिट गीतों को नए अंदाज में अपनाने का यह एक फैशन बन गया है

हालांकि उधार के गीतों के सहारे चमत्कार की कामना करने वाली ज्यादातर फिल्मों का हश्र निराशजनक ही रहा है. 2016 में आई फिल्म ‘वजह तुम हो’ के शीर्षक गीत के अलावा बाकी तीन गीत पुराने फिल्मी गीतों का रीमिक्स वर्जन थे. यानी मूल गीतों की धुन तोड़-मरोड़ कर पुराने बोलों सिनेमा 6616-31 जनवरी 2020 को ही उन पर चस्पा कर दिया गया. इसे न नकल कहा जा सकता है और न चोरी. कीमत देकर ये उधार लिए गए. इन उधार लिए गए गीतों- पल पल दिल के पास (ब्लैकमेल), ऐसे न मुझे तुम देखो सीने से लगा लूंगा (डार्लिंग डार्लिंग) और माही वे मोहब्बता सचियां ने (कांटे) में सबसे बड़ी समानता यह है कि तीनों गीत अपने दौर में तो लोकप्रिय हुए ही थे,बाद में भी उनकी मिठास कम नहीं हुई. लेकिन ‘वजह तुम हो’ में तीनों गीत बेअसर साबित हुए. एक तो उन्हें रीमिक्स करते हुए धुन के माधुर्य पर ध्यान नहीं दिया गया. दूसरे, उनका फिल्मांकन सपाट तरीके से हुआ. उनके लिए उपयुक्त सिचुएशन नहीं बन पाई. यह पहली मिसाल नहीं है.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 15 -31 जनवरी के अंक में…