भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का वार, केंद्र ने मांगी भ्रष्ट और नकारा कर्मियों की सूची

  • केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग अपने कर्मचारियों के काम की समीक्षा करें और उन कर्मचारियों का ब्योरा तैयार करें जो भ्रष्टाचार में शामिल हैं
  • कार्मिक मंत्रालय ने निर्देशानुसार कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा पूरे नियम और सत्यता के तहत की जाएगी और सुनिश्चित किया जाए

नई दिल्ली. मोदी सरकार भ्रष्टाचारियों पर लगाम नकेल कसने के लिए तैयारी पूरी कर चुकी है. केंद्र सरकार ने देश के सभी बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र और अन्य विभागों से भ्रष्ट और निठल्ले कर्मचारियों की सूची मांगी है.

केंद्र ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग अपने कर्मचारियों के काम की समीक्षा करें और उन कर्मचारियों का ब्योरा तैयार करें जो भ्रष्टाचार में शामिल हैं. इसके साथ ही उन कर्मचारियों की भी सूची सौंपी जाए तो काम से परहेज करते हैं.

कार्मिक मंत्रालय ने निर्देशानुसार कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा पूरे नियम और सत्यता के तहत की जाएगी और सुनिश्चित किया जाए कि जांच की आड़ में किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जबरन सेवानिवृत्ति की मनमामी कार्रवाई को अंजाम न दिया जा सके.

सभी सरकारी संस्थाओं को भ्रष्टाचार में लिप्त, नकारा कर्मचारियों का ब्योरा हर माह के पहले 15 दिनों के भीतर एक निर्धारित प्रारूप में उनके संबंधित मंत्रालयों के पास भेजना होगा. इस प्रक्रिया की शुरुआत 15 जुलाई से शुरू हो जाएगी.

पिछले दिनों ही टैक्स डिपार्टमेंट के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को इसी तरह के मामले में लिप्त होने पर कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा. सरकार इस तरह के मामले में दोषी पाए जाने पर कर्मचारियों को हटाने के लिए संविधान का सहारा लेगी.

मूल नियम 56 (जे), (आई) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के तहत जारी कार्मिक मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों और केंद्र सरकार में काम करने वाले कर्मचारियों का सेवा रिकार्ड की समीक्षा की जाएगी.

यह नियम सरकार को जनहित में उस सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्त करने की अनुमति देता है जिसकी ईमानदारी संदेहास्पद है और जो अपने काम प्रति को लेकर कोताही बरत रहा हो. इस स्थिति में सरकार ऐसे कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर सकती है.

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