मोदी सरकार का एक तीर से दो निशाना

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है. उनके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता और संघ विचारक नानाजी देशमुख और प्रख्यात संगीतकार भूपेन हजारिका को मरणोपरांत इस सम्मान से सम्मानित किया गया है.

लोकसभा चुनाव से पहले प्रणव दा को भारत रत्न देकर मोदी सरकार ने एक तीर से दो निशाना लगाया है. पहला झटका कांग्रेस को दिया है. अब कांग्रेसी मोदी सरकार या बीजेपी पर भेदभाव करने की राजनीति करने का आरोप नहीं लगा पाएंगे. लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार इस बात को कह सकेगी कि हमने तो प्रणव दा को भारत रत्न देने में देरी नहीं की, लेकिन कांग्रेस ने पं. दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को बाहरी दल का नेता होने के चलते नहीं दिया था.

वहीं दूसरा निशाना के तौर पर मोदी सरकार के इस कदम से बीजेपी की पकड़ पश्चिम बंगाल की जनता में और मजबूत होगी. प्रणव दा पश्चिम बंगाल के बड़े नेताओं में से एक हैं और प्रदेश की जनता उनका काफी सम्मान करती है. ऐसे में प्रणव दा को भारत रत्न का सम्मान देने से बीजेपी की पकड़ मजबूत होगी.

प्रणब दा को मिले भारत रत्न को सियासी रंग मिलना तय है. इन दिनों पश्चिम बंगाल में सियासी दायरा बढ़ाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही बीजेपी को ममता बनर्जी के सामने बड़े चेहरे की जरूरत है. भारत रत्न के फैसले को इसी कोशिश से जोड़कर देखा जाएगा.

पिछले साल 7 जून, 2018 को प्रणब मुखर्जी ने मुख्य अतिथि के तौर पर नागपुर के संघ हेडक्वार्टर में जाकर सियासी गलियारों में तूफान मचा दिया था. कांग्रेस पार्टी में कुछ नेता आगबबूला हुए तो बीजेपी नेताओं ने कहा कि पॉलिटिक्स में ‘छुआछूत’ पुरानी बात हो चुकी.