गंगासागर में लाखों तीर्थयात्रियों ने लगाई आस्था की डुबकी

  • कुपित होकर कपिल मुनि ने उन सभी को श्राप दे दिया और सभी भस्म हो गए थे
  • हिंदू रीति के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में डुबकी लगाने का खास महत्व है

कोलकाता. मकर संक्रांति के अवसर पर पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने बुधवार को गंगासागर में आस्था की डुबकी लगाई. जिला प्रशासन का कहना है कि कमोबेश 35 लाख लोगों ने इस बार स्नान किया है. राज्य सरकार ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. तट पर ड्रोन के जरिए निगरानी हो रही है. एक हजार सीसीटीवी लगाए गए हैं. 10 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती है और 150 कंट्रोल रूम बनाए गए हैं.

तीर्थयात्रियों ने बुधवार सुबह 5:00 बजे से ही गंगासागर में स्नान शुरू कर दी. महिलाएं, बुजुर्ग, युवा हर आयु वर्ग के लाखों लोगों का यहां जमघट है. सभी श्रद्धालु गंगासागर स्नान के बाद कपिल मुनि आश्रम में पूजा-अर्चना कर रहे हैं. विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने सागर तट पर शिविर लगाए हैं. तीर्थ यात्रियों के रहने, खाने, सोने, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई है.

हिंदू रीति के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में डुबकी लगाने का खास महत्व है. कहते हैं ‘सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार’. ऐसी कथा है कि त्रेता युग में कपिल मुनि आश्रम में तपस्या कर रहे थे. उसी समय राक्षसों ने राजा सगर के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को उनके आश्रम में बांध दिया. राजा सगर के पुत्रों ने सोचा कि अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा ऋषि ने बांध रखा है, इसलिए हमला कर दिया था.

कुपित होकर कपिल मुनि ने उन सभी को श्राप दे दिया और सभी भस्म हो गए थे. दुखी राजा सगर ने कपिल मुनि से उनके मोक्ष का उपाय पूछा था. मुनि ने बताया कि स्वर्ग से अगर गंगा धरती पर उतरे और उनके मरे हुए पुत्रों के शरीर को स्पर्श करें तभी उन्हें मोक्ष मिलेगी.

इसके बाद राजा सगर के वंशज भागीरथ ने कड़ी तपस्या की, जिसके बाद गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ. गंगा की धाराएं कपिल मुनि के आश्रम तक पहुंची और राजा सगर के पुत्रों को मुक्त करते हुए सागर में विलीन हो गई. तब से हर साल लाखों लोग यहां उसी तिथि पर मोक्ष के लिए स्नान करते हैं.

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश

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