वनडे की तरह टेस्ट क्रिकेट को भी बनाया जाएगा रोमांचक, MCC की इन सिफारिशों पर हुई चर्चा

  • इस वक्त टेस्ट क्रिकेट अपने अस्तिस्तव की लड़ाई लड रहा है
  • टेस्ट को दिलचस्प बनाने के लिए समय बर्बाद होने से रोकने के लिये ‘शाट क्लॉक’, विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के लिये मानक गेंद का इस्तेमाल

नई दिल्ली. क्रिकेट को रोचक बनाने के लिए पिछले दिनों दुनियाभर में तमाम प्रयोग किए गए है. जिसके कई पॉजिटिव बदलाव भी देखने को मिले है. फटाफट क्रिकेट की बढती पॉपुलैरिटी से कई देशों में टी 20 लीग शुरू की गई. टी20 मैच में दर्शकों की बढ़ती तादाद यूं तो क्रिकेट के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है.

लेकिन इसका असर क्रिकेट के असल फॉर्मेट यानि टेस्ट क्रिकेट पर भी पड़ा है. इस वक्त टेस्ट क्रिकेट अपने अस्तिस्तव की लड़ाई लड रहा है. टेस्ट क्रिकेट में दर्शकों की घटती संख्या इस बात की ओर साफ इशारा करती है कि अगर जल्द ही टेस्ट फॉर्मेट को बचाने के लिए कोई कवायद नहीं की गई तो वो दिन दूर नहीं जब हर कोई टेस्ट क्रिकेट से दूर भागना चाहेगा.

इसलिए क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था (एमसीसी) वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी ने टेस्ट क्रिकेट को और रोमांचक बनाने के लिए कुछ प्रस्ताव दिए हैं. टेस्ट को दिलचस्प बनाने के लिए समय बर्बाद होने से रोकने के लिये ‘शाट क्लॉक’, विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के लिये मानक गेंद का इस्तेमाल और नो-बॉल के लिये फ्री हिट जैसी सिफारिशें पर चर्चा की गई.

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले हफ्ते बेंगलुरु में हुई बैठक में टेस्ट क्रिकेट के लिये कुछ बदलावों का सुझाव दिया है. इस समिति में पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली भी शामिल रहे. टेस्ट में स्लो ओवर रेट काफी धीमी प्रक्रिया है जिससे प्रशंसक खेल से थोड़ा दूर हो रहे हैं. इसलिये एमसीसी ने ‘शाट क्लॉक’ शुरू करने की जरूरत महसूस की.


एमसीसी ने कहा कि जब इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के प्रशंसकों से टेस्ट क्रिकेट में दर्शकों की कम हिस्सेदारी के मुख्य वजह पूछी गई, तो 25 प्रतिशत प्रशंसकों ने स्लो ओवर रेट का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन देशों में स्पिनर बहुत कम ओवर फेंकते हैं, एकस्ट्रा टाइम के बावजूद भी एक दिन में 90 ओवर नहीं पूरे हो पाते है.

इसके साथ ही एमसीसी ने माना कि डीआरएस भी खेल की गति को धीमा करता है. इसलिए समिति को लगता है कि खेल की रफ्तार को बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाए जाने चाहिए. इससे पहले भी टेस्ट मैच में दर्शकों की भीड जुटाने के लिए डे नाइट टेस्ट की शुरूआत हो चुकी है. हालांकि ये तरीका भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो सका.

अब इस बात पर भी सब की नज़र होगी कि इन नियमों को अगर लागू भी कर दिया जाएं तो टेस्ट क्रिकेट में क्या वाकई दर्शक की भीड जुट पाएंगी या नहीं. इससे पहले भी टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने लिए कई उपाय किए जा चुके है. लेकिन इन उपायों का टेस्ट क्रिकेट पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा.

अगर टेस्ट क्रिकेट को सच में बढावा देने है तो क्रिकेट की टी10 जैसी दोयम दर्जे की लीग पर लगाम लगानी चाहिए. इसके साथ ही दुनियाभर में बढ़ती टी20 लीग के पर भी रोक लगानी होगी. टी20 लीग की वजह से कई खिलाड़ी अपने इंटरनेशनल मैचों को भी दरकिनार कर चुके है.

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