शहादत के 21 साल बाद शहीद मेजर सुधीर वालिया की प्रतिमा को मिली जगह

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आंतकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए अशोक चक्र विजेता मेजर सुधीर वालिया की प्रतिमा को स्थापित करने में 21 साल का समय लग गया. शहीदों के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर वोटों की राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों को शहीद मेजर सुधीर वालिया की प्रतिमा लगाने की इतने लंबे अरसे तक याद नही आई. आखिरकार शहादत के पूरे 21 साल के बाद शनिवार को धर्मशाला-पालमपुर बाईपास चौक पर पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी व शहीद के परिजनों की उपस्थिति में शहीद की प्रतिमा का अनावरण हुआ. शहीद के पिता सूबेदार रूलिया राम ने कहा 21 वर्षों के उपरांत पालमपुर में शहीद के नाम प्रतिमा की स्थापना हुई है.

वहीं शांता कुमार ने कहा कि पालमपुर की जनता और प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र के शहीदों को पूरा सम्मान दिया जा रहा है. उन्होंने माना कि शहीद मेजर सुधीर वालिया की प्रतिमा स्थापना में विलंब हुआ है, लेकिन प्रशासन ने अच्छी व्यवस्था की है. राज्यसभा सदस्य इंदु गोस्वामी ने कहा उन्होंने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से वादा किया था कि शहीदों को न्याय मिलना चाहिए.

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही यहां बैंच की स्थापना और प्रतिमा स्थल का सौंदर्यीकरण करवाया जाएगा तथा बाद में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से इसका पुनः अनावरण करवाया जाएगा. इस मौके पर स्थानीय विधायक आशीष बुटेल भी उपस्थित रहे. इसके बाद करणी सेना की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए शहीद के पिता सूबेदार रूलिया राम वालिया ने रक्तदाताओं को आशीर्वाद दिया.

मेजर सुधीर वालिया 29 अगस्त, 1999 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के जंगलों में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे. नौ वर्ष की सैन्य सेवा में उन्होंने 15 मेडल प्राप्त किए थे. श्रीलंका में उन्हें शांति दूत के रूप में भी पुकारा जाता था. उन्होंने भारतीय सेना में दो बार लगातार सेना मैडल प्राप्त किया था.

हिन्दुस्थान समाचार/सतेंद्र