125 सालों बाद आया है ऐसा सावन, बन रहे हैं कई शुभ संयोग

सावन का महीना आते ही शिवभक्त उनके दर्शन के लिए अपने- अपने घरों से निकल पड़ते हैं. ये महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है. 125 सालों बाद सूर्य प्रधान उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में सावन की शुभ शुरूआत हो रही है. इस दिन वज्र- विष कुंभ योग का संयोग पड़ रहा है. एक अगस्त को हरियाली अमावस्या पड़ रही है. इस दिन पंच महायोग का संयोग पड़ रहा है. सावन में शिव के दर्शन करने के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है.

सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. इस महीने में शिव मंदिरों में भक्तों की काफी संख्या में भीड़ होती है. सावन में कई शुभ संयोग बन रहे हैं. कहा जाता है कि त्रेतायुग में श्रवण कुमार ने पहली बार कांवड़ यात्रा शुरू की थी. माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराने के लिए श्रवण हिमाचल के ऊना से हरिद्वार की यात्रा पर निकले थे. कहा जाता है कि श्रवण के माता- पिता ने हरिद्वार में गंगा स्नान की इच्छा प्रकट की थी.

जिसके बाद श्रवण कुमार उनको अपने कंधे पर बैठा कर गंगा स्नान के लिए हरिद्वार लाए थे. जब उन्होने अपने मां-बाप को गंगा दर्शन करा दिए और स्नान करने के पश्चात अपने साथ गंगा जल भी ले गए थे. तब से ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई.

सावन को सुबह शुभ मुहुर्त में उठकर नित्य कर्मों के बाद स्नान ध्यान करके शिव के मंदिर में जाना चाहिए. संभव हो सके तो प्रत्येक सोमवार को व्रत का संकल्प लेना चाहिए. दिन में फलाहार किया जा सकता है. साथ ही दुग्धपान करना लाभप्रद है. सावन माह में लाल या भगवा गमछा या वस्त्र अवश्य पहनें .शिवभक्त बोल बम का जयकारा लगाते हुए बाबा विश्वनाथ को जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करते हैं. बाबा को पवित्र गंगा जल चढ़ाया जाता है जिससे वो प्रसन्न होते हैं.

मान्यता है बाबा को बेलपत्र और दुग्धाभिषेक, धतूरा चढ़ाने से शिव की कृपा बरसती है. विशेष रुप से सोमवार को शिव की पूजा- अर्चना अवश्य करनी चाहिए. सावन के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है.

सावन महीने के चारों सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस महीने में जो शिव भक्त पूरे मनोयोग से उनकी पूजा-अर्चना करता है उसकी मुराद भगवान शिव और पार्वती अवश्य पूरी करते हैं. उत्तर भारत में खासकर सावन के महीने में भक्तों का उल्लास देखते ही बनता है. सड़क से लेकर मंदिर तक हर ओर भगवान शिव के भक्त ही नजर आते हैं.

मधुकर वाजपेयी / Madhuakar Vajpayee

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