जन्मभूमि बिहार और कर्मभूमि मुंबई, मैं एक बिहारी मुंबइकर हूं : मनोज बाजपेयी

manoj vajpayee
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नई दिल्ली: एक्टर मनोज बाजपेयी को फिल्म इंडस्ट्री में आए 26 साल हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि उनका जन्मभूमि बिहार और कर्मभूमि मुंबई है और वे एक बिहारी मुंबइकर हैं. मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘भोंसले’ 26 जून को सोनी लिव पर रिलीज हुई है. उन्होंने अपनी फिल्म की रिलीज पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है. वीडियो में वो अपने सफर का जिक्र कर रहे हैं और लोगों को एक मैसेज भी दिया है.

वीडियो में मनोज बाजपेयी कहते हैं-‘मुझे इंडस्ट्री में आए हुए 26 साल हो गए हैं. आज भी मैं वो दिन याद करता हूं जब मैं पहली बार बिहार से दिल्ली और फिर दिल्ली से मुंबई आया था. जन्मभूमि बिहार और कर्मभूमि मुंबई. जी हां, मैं एक बिहारी मुंबइकर हूं. यहां हर सेकेंड एक प्रवासी सैकड़ों सपने लिए इस शहर में आता है, चाहे वो बिहारी हो या फिर मराठी.

वो कह रहे हैं कि मुंबई सबका स्वागत बांहे खोलकर करती है. उन सपनों का पीछा करने में आप कई बार गिरते हैं, लड़खड़ाते हैं, टूटते हैं, बिखर जाते हैं, फिर उठते हैं, लड़ते हैं और आगे बढ़ते चले जाते हैं, लेकिन मैंने हार नहीं मानी, यहां तक कि कई मराठी व्यक्त‍ि के किरदार कर डाले. चाहे वो पिछला किरदार सत्या म्हात्रे का हो या अलीगढ़ का रामचंद्र सिरस हो. इन सबने अपने शब्दों और संवाद से आपका मन मोह लिया था.

लेकिन इस बार एक नया किरदार आप लोगों को ना सिर्फ अपनी चुप्पी से, खामोशी से अपनी तरफ आकर्ष‍ित ही नहीं करेगा, बल्क‍ि पूरी तरह से आपको जीत लेगा और इस नए किरदार का नाम है गणपत भोंसले. 26 साल हो गए मुझे इंडस्ट्री में, मैंने आज भी उसी शिद्दत से इस फिल्म को किया है जिस तरह से मैंने अपनी पहली फिल्म और पहले किरदार को निभाया था. मैं आशा करता हूं मेरी ये कोशिश बहुत अच्छी लगेगी, जरूर देखिएगा भोंसले 26 जून को सोनी लिव पर.’ 

फिल्म भोंसले में मनोज बाजपेयी ने गणपत भोंसले का किरदार निभाया है. फिल्म में मनोज के साथ संतोष जुवेकर, इप्शिता चक्रवर्ती सिंह और अभिषेक बनर्जी मुख्य भूमिका में हैं. देवाशीष मखीजा ने फिल्म को लिखा और निर्देशित किया है. साल 2018 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में इसका लुक लॉन्च किया गया था. इसके बाद फिल्म भोंसले को बुसान फिल्म फेस्टिवल, मामी फिल्म फेस्टिवल, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल रॉटरडैम, बेंगलुरु इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, सिंगापुर दक्षिण एशियाई फिल्म समारोह जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाया गया था. 

मनोज बाजपेयी को साल 1994 में ओमपुरी, नसरुद्दीन शाह और आशीष विद्यार्थी स्टारर फिल्म ‘द्रोहकाल’ में एक छोटी सी भूमिका निभाने का मौका मिला था. इसी साल मनोज की एक और फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’आई. शेखर कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मनोज बाजपेयी ने डाकू मान सिंह का किरदार निभाकर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.

साल 1995 में मनोज को टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले मशहूर सीरियल ‘स्वाभिमान’ में काम करने का मौका मिला. साल 1998 में मनोज बाजपेयी ने राम गोपाल वर्मा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सत्या’ में काम किया.

फिल्म में भीखू म्हात्रे के किरदार में उन्हें काफी सराहा गया. इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. साल 2003 में फिल्म ‘पिंजर’ में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

बॉलीवुड के संजीदा अभिनेताओं में शुमार मनोज बाजपेयी हाल ही में 51 साल के हुए हैं. मनोज ने अपने शानदार अभिनय से फिल्म जगत में अपनी खास पहचान बनाई है. उनकी प्रमुख फिल्मों में तमन्ना, फिजा, जुबैदा, एलओसी कारगिल, जागो, फरेब, राजनीति, आरक्षण, सरकार 3, बागी 2, सोनचिरैया आदि शामिल हैं. इसके अलावा मनोज वेब सीरीज में भी नजर आए हैं. 

हिन्दुस्थान समाचार/ मोनिका शेखर