ये मछली न खाएं..है हेल्थ के लिए HARMFUL

खाने का जायका बढाने वाली विदेशी मांगुर मछलियों का स्वाद में आपको बहुत पसंद होंगी. स्वादिष्ट लगने वाली यह मछली पर्यावरण और भारत की बायो डाइवर्सिटी के लिए अच्छी साबित नहीं हो रही है.

विदेशी मांगुर मछलियां भारत की बायो डाइवर्सिटी को नुकसान पहुंचा रही हैं. मत्स्य वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस मछली के पालन को नियंत्रित या बैन नहीं किया गया तो कई पानी के पौधे व पानी में रहने वाले जीव इस धरती से विलुप्त हो जाएंगे.

इन विदेशी मछलियों के कारण अल्सरेटिव फिश सिंड्रोम की बीमारी का खतरा बढा है. इससे न केवल हेल्थ पर खतरा है, बल्कि तालाबों को काफी नुकसान हो रहा है. दूषित मांस इन मछलियों को खिलाए जाने से आस-पास का एंवायरमेंट प्रदूषित होता है.

मछलियों से कई स्तर पर होने वाले नुकसान को देखते हुए National Green Tribunal (NGT) भी सख्त हुआ है. NGT ने बायोडाइवर्सिटी पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव पर गंभीरता दिखाई है.

NGT ने यहां ताल-तलैयों से विदेशी मांगुर मछलियों को तुरंत नष्ट करने का आदेश दिया है. NGT ने कहा है कि दिल्ली समेत देश भर के ताल-तलैयों और नदियों में विदेशी मांगुर मछलियों को पालने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

इसले अलावा देशी यानी भारतीय मांगुर मछलियों को पालने पर प्रतिबंध नहीं हैं, क्योंकि यह भारत की बायो डाइवर्सिटी और इको सिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचाती है. इनका पालन किया जा सकता है.

NGT के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली बेन्च ने कानून का हवाला भी दिया गया. बेन्च ने कहा कि सभी राज्यों में विदेशी मांगुर मछलियां पालने पर बैन है.

बेन्च ने कहा कि केंद्र और राज्यों के संबंधित जिला अधिकारी को तत्काल प्रभाव से यहां के ताल-तलैयों से इस विदेशी मछलियों को खत्म करने का आदेश दिया है.

बेंच ने अधिकारियों को मतस्यपालन डिपार्टमेंट के साथ मिलकर स्पेशल टीमें बनाने को कहा है. इसके अलावा यह अधिकारियों की ही रिस्पान्सिबिलिटी होगी कि मांगुर मछलियों की पहचान कर उन्हें खत्म कर दिया जाए.

NGT के  पुराने आदेश को लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश के मछली पालकों की मांग को ठुकराते हुए यह नया आदेश दिया है.

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