श्री राम बारात : पालकी को मंडलायुक्त अग्रवाल ने कंधों पर उठाया, लोगों में बना चर्चा का विषय

  • सीताराम विवाह मिथिला और अवधी दो संस्कृतियों का अनूठा बन्धन है
  • कनक भवन मंदिर से निकली बारात में नवागत मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने भगवान श्री राम की पालकी अपने कंधों पर उठाई और बारात को नगर दर्शन के लिए ले गए

अयोध्या, 02 दिसम्बर (हि.स.). त्रेतायुग मेंं मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी का विवाह जनक नन्दनी सीता से हुआ था. हजारों वर्ष बीत जाने के उपरांत आज भी अयोध्या समेत जनकपुर मेंं श्री सीताराम विवाह महोत्सव मनाने की परम्परा जीवंत है.

सीताराम विवाह मिथिला और अवधी दो संस्कृतियों का अनूठा बन्धन है. कनक भवन मंदिर से निकली बारात में नवागत मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने भगवान श्री राम की पालकी अपने कंधों पर उठाई और बारात को नगर दर्शन के लिए ले गए.

लोगों में यह दृश्य चर्चा का विषय बना हुआ है. इतना ही नहीं मंडलायुक्त अग्रवाल ने पूरी रात जागकर मंदिर प्रांगण में विधि विधान से सीता राम विवाह भी संपन्न कराया.

जिलाधिकारी के कार्यकाल में भी मंडलायुक्त अग्रवाल अयोध्या में रहने पर कनक भवन मंदिर में आयोजित शयन आरती में सपरिवार बच्चों के साथ शरीक होते रहे हैं. उनकी आस्था श्री सीताराम विवाह महोत्सव में बनी है.

वहीं दूसरी तरफ रंगमहल मंदिर में सीता राम विवाह में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अपने पुत्र ई. अभिषेक सिंह को विवाह में मुख्य यजमान के रूप में सम्मिलित कराया. पिछले वर्ष वह स्वयं जनक की भूमिका में थे.

इस बार व्यस्तता के कारण वहां शरीक नहीं हो पाए. धर्म नगरी अयोध्या के प्रमुख मन्दिरों मेंं शुमार कनक भवन, श्री राम वल्लभा कुंज जानकी घाट, राम कोट स्थित रंग महल, जानकी महल, श्री राम हर्षण कुंज, दिव्य कला मंदिर, विहाऊती भवन, श्री मणिराम दास की छावनी, दर्शन भवन रामानंद जी का स्थान, दशरथ महल, राम हर्षण कुंज , हनुमान बाग, लक्ष्मन किला, गोलाघाट रामसखी मंदिर आदि दर्जनों मठ मन्दिरों मेंं श्रीरामजी का विवाहोत्सव विधि विधान से मनाया जाता है.

साथ ही प्रमुख मार्गों से होकर राम बारात निकाली जाती है. बारात देखने हेतु दूर-दराज से श्रद्धालुओं का आगमन होता है.

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हिन्दुस्थान समाचार /पवन पाण्डेय/शंकर 

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