धूमधाम से मनाई गई बंकिम चंद्र की जयंती, ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

  • नगरपालिका अध्यक्ष शंकर बेरा ने नगरपालिका परिसर में बंकिम चंद्र चटर्जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर रक्तदान शिविर का शुभारम्भ किया
  • साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चटर्जी को जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने याद कर श्रद्धांजलि दी है

पूर्व मेदिनीपुर. जिले के एगरा नगरपालिका में बंकिम चंद्र चटर्जी की 182वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई.

नगरपालिका अध्यक्ष शंकर बेरा ने नगरपालिका परिसर में बंकिम चंद्र चटर्जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर रक्तदान शिविर का शुभारम्भ किया. शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया.

इसके साथ इस वर्ष माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर उत्तीर्ण 120 छात्र-छात्राओं को पुष्प गुच्छ, मिठाइयां, स्कूल बैग एवं सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया.

धूमधाम से मनाई गई बंकिम चंद्र की जयंती

बेरा ने कहा कि भविष्य में उच्चशिक्षा प्राप्त कर इसी प्रकार जीवन पथ पर आगे बढ़ने की जरूरत है. उन्होंने उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना दी. इस मौके पर नगरपालिका उपाध्यक्ष पारुल माईति समेत कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे.

बंकिम चंद्र चटर्जी को ममता ने दी श्रद्धांजलि

कोलकाता. साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चटर्जी को जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने याद कर श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने इस बारे में ट्विटर पर लिखा है. इसमें उन्होंने कहा कि वंदे मातरम! आज साहित्य सम्राट बंकिम चंद्र चटर्जी की जयंती है.इस मौके पर मैं उन्हें प्रेमपूर्वक याद कर श्रद्धांजलि दे रही हूं.

बंकिम चन्द्र चटर्जी का जन्म 26 जून, 1838 को हुआ था. वे 19वीं शताब्दी के बंगाल के प्रकाण्ड विद्वान् और महान् कवि और उपन्यासकार थे. 1874 में प्रसिद्ध देश भक्ति गीत वन्देमातरम् की रचना की. जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया. प्रसंगतः ध्यातव्य है कि वन्देमातरम् गीत को सबसे पहले 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था.

बंकिम चन्द्र चटर्जी का जन्म बंगाल के 24 परगना ज़िले के कांठल पाड़ा नामक गांव में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. बंकिम चन्द्र चटर्जी बंगला के शीर्षस्थ उपन्यासकार हैं. उनकी लेखनी से बंगला साहित्य तो समृद्ध हुआ ही है. हिन्दी भी उपकृत हुई है. वे ऐतिहासिक उपन्यास लिखने में सिद्धहस्त थे.

वे भारत के एलेक्जेंडर ड्यूमा माने जाते हैं. इन्होंने 1865 में अपना पहला उपन्यास ‘दुर्गेश नन्दिनी’ लिखा. उनका निधन आठ अप्रैल, 1894 को हुआ.

हिन्दुस्थान समाचार/गंगा/ओम प्रकाश

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