भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार ये महिला अफसर पहुंची लद्दाख

मेजर जनरल माधुरी कानिटकर (Madhuri Kanitkar) सियाचिन जाने वाली देश की पहली महिला अफसर बन गई हैं. उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उत्तरी कमांड क्षेत्र के लिए युद्ध चिकित्सा देखभाल के प्रभारी मेजर जनरल (मेडिकल), उधमपुर का कार्यभार संभालने का जिम्मा मिला. इसके चलते वो शुक्रवार को लद्दाख पहुंची जहां उन्होंने फील्ड मेडिकल टीम के युवा डॉक्टर्स और जवानों के साथ बातचीत की. इसके अलावा उन्होंने मेडिकल सुविधाओं की भी समीक्षा की.

दरअसल उत्तरी कमांड जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद और आतंकवाद निरोधी अभियानों में लगी भारतीय सेना की एक संचालन कमांड है. पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट मेजर जनरल माधुरी कानिटकर सशस्त्र बल मेडिकल कालेज यानी AFMC की पहली महिला डीन रही हैं.

मेजर जनरल अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उत्तरी कमांड क्षेत्र में सशस्त्र बलों के कर्मियों की चिकित्सा देखभाल करेंगी.

1980 में माधुरी ग्रैजुएट हुईं और एमबीबीएस की टॉपर बनीं। उन्हें इसके लिए बेस्ट स्टूडेंट का खिताब मिला और गोल्ड मेडल से नवाजा गया. इसके बाद माधुरी ने पीडियाट्रिक्स में पोस्ट ग्रैजुएशन किया. लगभग चार दशक तक मेडिकल फील्ड में काम करने के बाद वो सेना की पहली ट्रेन्ड पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजिस्ट बनीं और उन्हें AFMC का डीन बनाया गया.

उन्हें आर्मी मेडिकल कोर में पहली बाल चिकित्सा नेफ्रोलॉजी यूनिट स्थापित करने का भी श्रेय दिया जाता है. साथ ही वो देश की तीसरी महिला हैं जिन्हें लेफ़्टिनेंट जनरल का औहदा मिला था.

खास बात तो ये है कि उनके पति राजीव कानिटकर, जो खुद आर्मी में हैं उन्होंने माधुरी का काफी साथ दिया. पति के सपोर्ट से ही वो आज यहां तक आ पाई हैं.

माधुरी कानिटकर को पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया था.

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