राजनीतिज्ञ गांधी

रामबहादुर राय

ऐसा क्या है कि पूरी दुनिया गांधीजी में आज भी रुचि ले रही है? देश-दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उनके विचारों की ओर उम्मीद से देखा जा रहा है.

कुछ तो है. गांधी विचार में नवीनता अगर नहीं होती तो 71 साल बाद भी उन पर अध्ययन का सतत क्रम बना नहीं रहता. उनके विश्वव्यापी महत्व को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि करीब सौ देशों में उनके चित्र वाले 250 से ज्यादा डाक टिकट जारी हुए हैं.

हमारे देश में नगदी के नोटों पर उनके चित्र हैं. हर शहर में उनके नाम पर सड़कें हैं. जगह-जगह, चैराहों पर, भवनों के भीतर उनकी प्रतिमा-फोटो लगी रहती है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में महात्मा गांधी का एक डिजिटल संग्रहालय बनवाया है. लेखक और क्यूरेटर विरद राजाराम याज्ञनिक ने बताया कि 120 देशों से लोग संग्रहालय देखने आ चुके हैं.

इस संग्रहालय में नई पीढ़ी महात्मा गांधी के साथ सेल्फी ले सकती है. आने वाला हर दर्शक ऐसा कर भी रहा है. इस संग्रहालय में गांधीजी की आवाज सुनी जा सकती है.

दर्शक यहां आकर देख सकते हैं कि युवा गांधी ने कैसे महात्मा गांधी की यात्रा पूरी की. इतिहास में ऐसा कोई नहीं है, जिस पर इतने विविध माध्यमों से निरंतर काम हो रहा हो.

जिस पर इतनी संख्या में हर साल पुस्तकें भी छपती हों, जितनी महात्मा गांधी पर छपती हैं.

ऐसे गांधीजी को उनके जीवनकाल में ही आदर और श्रद्धा से अनेक नामों से विभूषित किया गया. वे नाम उनके पर्याय बन गए हैं. चलन में बने हुए हैं.

रवींद्रनाथ ठाकुर ने उन्हें महात्मा कहा. नेताजी सुभाष चंद्र बोस उनसे स्वाधीनता संग्राम की पद्धति पर राजनीतिक रूप से असहमत थे, फिर भी युद्ध की रणभेरी बजाने से पहले उन्हें राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया.

वह संबोधन विदेश की भूमि से था. गुजरात ने उन्हें प्यार से बापू कहा. विंस्टन चर्चिल ने उन्हें नंगा फकीर कहा. नेलशन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग जैसे विभूतियों ने उन्हें अहिंसा का पुजारी माना.

वे उनके रास्ते पर चले. उनकी मां उन्हें मुनिया पुकारती थी. इतिहासकार धर्मपाल की धारणा थी कि वे हनुमान रूप थे. क्या ऐसा कोई अभागा होगा जो महात्मा गांधी का नाम न सुना हो? 

शायद ही ऐसा कोई होगा. फिर भी यह जानना रह ही जाता है कि वे वास्तव में कौन थे? यह इस पर भी निर्भर करता है कि कौन किस नजरिए से उन्हें देख रहा है.

इसी तरह एक प्रश्न और है कि उन्हें समग्रता में जानने के लिए किस नाम से पुकारें? इसका एक  उत्तर यह हो सकता है कि मोहन दास से महात्मा गांधी बनने की कहानी को भली-भांति समझें. इससे उन्हें जानना संभव हो सकता है.

पूरा लेख पढ़ें नवोत्थान के जून के अंक में…

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