व्यवसायों में उलझ कर रह गया है धर्म: महामंडलेश्वर मार्तण्डपुरी

बेगूसराय, 13 जुलाई. सिमरिया धाम स्थित अखिल भारतीय सर्वमंगला सिद्धाश्रम में आयोजित राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में वेद की भूमिका विषयक तीन दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए आध्यात्मिक गुरु सह प्रयागराज महामंडलेश्वर मार्तण्ड पुरी ने कहा कि हमारे अंतर का ज्ञान ही वेद का आधार है.

वेद सृष्टि के संचालन का मैनुअल है. आज के समाज में सबसे बड़ी आवश्यकता है वेद को उसके मूल रूप में प्रतिष्ठित करना, जो नहीं हो रहा है.

शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज धर्म व्यवसायों में उलझ कर रह गया है. मोह का क्षय होना ही मोक्ष हैं, जो वेद को जानने से ही संभव हैं.

जो धर्म की रक्षा करेगा, धर्म भी उसकी ही रक्षा करेगा. महामंडलेश्वर ने कहा कि समाज में शास्त्रों के आधार पर लोगों में ज्ञान नहीं है.

जब तक मनुष्य खुद को मनुष्य बनाने का काम नहीं करेगा, तब तक राष्ट्र का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है.

स्वामी सत्यानंद ने कहा कि आदि कुंभस्थली मिथिला के सिमरिया की धरती सिर्फ धर्म और आध्यात्म ही नहीं ज्ञान की जननी भी है.

अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद के संस्थापक डॉ. घनाकार ठाकुर ने कहा कि पूर्व में वेदों की 11 सौ 31 शाखा थी, उसमें से अब मात्र 12 बची हुई है.

इसके बावजूद भी वेदों ने ही समाज को एक सूत्र में बांधा और समाज को एक राष्ट्र के रूप में देखा है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अंतरराष्ट्रीय कवि-साहित्यकार सह वेद विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने गुरु-शिष्य परंपरा और वेदों के बारे में विस्तार से अपनी रखी.

इससे पूर्व स्वामी चिदात्मनजी महाराज की मौजूदगी में तमाम अतिथियों ने पं. शम्भू मिश्र एवं आचार्य नारायण के वैदिक ऋचा से वेद पाठ के बीच गुरु पूर्णिमा तक चलने वाले संगोष्ठी का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया.

राज किशोर प्रसाद सिंह एवं प्रो. पीके झा प्रेम ने संयुक्त रूप से अतिथियों का स्वागत किया. मौके पर सर्वमंगला समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह, स्वामी अरुणानंद, सुशील चौधरी, नवीन प्रसाद सिंह, दिनेश झा एवं डॉ आनंद कुमार ठाकुर ने भी विचार रखे. हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र

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