‘महा’ तूफान और ‘बुलबुल’ का असर, MP के पश्चिमी जिलों में होगी तेज हवाओं के साथ बारिश

भोपाल, 06 नवम्बर (हि.स.). अरब सागर में उठा भीषण चक्रवात ‘महा’ अब रास्ता बदलकर गुजरात के दक्षिण तटीय भागों की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. अभी यह पोरबंदर से पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में 660 किलोमीटर दूर है. यह जल्द ही पूर्वी उत्तर-पूर्वी दिशा में बढ़ते हुए 7 नवंबर की सुबह तक पोरबंदर के आसपास से लैंडफॉल करेगा.

इसके चलते मध्य प्रदेश में भी मौसम बदलेगा. राज्य में भारी से अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग पहले ही अलर्ट जारी कर चुका है.

वहीं इस बीच बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवाती तूफान बुलबुल भी बनता नजर आ रहा है. इन दोनों तूफानों का असर मध्य प्रदेश के कई जिलों में 7 और 8 नवम्बर को मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है. गुजरात की सीमा से लगे मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में ज्यादा बारिश होने की संभावना भी जताई जा रही है.

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक पीके साहा ने बताया कि मौसम प्रणाली के चलते एक ट्रफ रेखा उत्तर पूर्वी अरब सागर से होते हुए पश्चिमी मध्य प्रदेश तक बनी है, जिसके कारण अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम मध्य प्रदेश में बादल बढ़ जाएंगे. अनुमान है कि बुधवार शाम से उज्जैन, रतलाम, खरगोन सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा देखने को मिलेगी. पश्चिमी मध्य प्रदेश में बादल अगले दो-तीन दिनों तक बने रहेंगे.

हवाएं भी चलती रहेंगी और अधिकांश स्थानों पर हल्की वर्षा होने कि संभावना है. धार, रतलाम, शाजापुर सहित आसपास के भागों में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है. ग्वालियर में भी बारिश हो सकती है.

पूर्वी मध्य प्रदेश में चक्रवाती तूफान का प्रभाव नहीं रहेगा क्योंकि गुजरात पर लैंडफॉल के समय से ही तूफान कमजोर हो जाएगा जिससे पूर्वी मध्य प्रदेश इन बारिश की उम्मीद फि़लहाल दिखाई नहीं दे रही है. रीवा, सतना, सागर, खजुराहो सहित पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा. इससे तापमान में कमी आएगी.

महा तूफान और बुलबुल पर एक नजर
-दो तूफान भारत की तरफ बढ़ रहे हैं. एक बुलबुल दूसरा महा तूफान.
-बुलबुल इस वर्ष का 7वां चक्रवाती तूफान होगा.
-मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह तूफान उत्तरी अंडमान सागर में एक निम्न दबाव के क्षेत्र बनने से विकसित हुआ है.

-उम्मीद की जा रही है कि यह सिस्टम पश्चिम और उत्तर पश्चिम दिशा में चला जाएगा.
-खासकर 5 और 6 नवम्बर को यह बंगाल की खाड़ी के मध्य-पूर्व पर डिप्रेशन का क्षेत्र बना सकता है.
-इस कारण कई राज्यों तक दो से चार दिनों तक बारिश देखी जा सकती है.
-मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक आने वाले 6 से 7 दिनों यह सिस्टम खाड़ी में बना रहेगा.

हिन्दुस्थान समाचार/ नेहा पाण्डेय/वीरेन/मुकुंद

Leave a Comment