#ELECTION2019: दिल्ली की इस LOKSABHA सीट पर A+A+G की चर्चा…
  • लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने महेश गिरी का टिकट काटकर क्रिकेटर गौतम गंभीर को चुनाव मैदान में उतारा है
  • कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली उनको कठिन चुनौती दे रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने आतिशी को मैदान में उतारा है

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 59 सीटों पर 12 मई को मतदान होगा. इनमें देश की राजधानी दिल्ली की सभी 7 सीटें भी शामिल हैं. यहां हर सीट पर दिलचस्प मुकाबला है. दिल्ली में सबसे ज्यादा रोमांच ईस्ट दिल्ली लोकसभा सीट पर है.

इस बार के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने महेश गिरी का टिकट काटकर क्रिकेटर गौतम गंभीर को चुनाव मैदान में उतारा है. कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली उनको कठिन चुनौती दे रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने आतिशी को मैदान में उतारा है.

गौतम गंभीर (BJP) गौतम गंभीर को सेलेब्रिटी होने का फायदा मिल रहा है, तो उनके सामने एक कठिनाई भी खड़ी हो रही है. वो जनता से सीधे कनेक्ट नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि क्रिकेट के पिच पर अपना जलवा दिखने वाले गौतम गंभीर को इस सीट से जीत मिलती है या नहीं.

अरविंदर सिंह लवली (CONGRESS)
अरविंदर सिंह लवली एक युवा राजनेता हैं. उनकी गिनती दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के सबसे ज्यादा करीबियों में होती है. अरविंदर सिंह लवली राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं, वो कई बार विधायक रह चुके हैं. जनता के बीच में किस तरह से जाया जाता है, उन्हें ये बखूबी पता है. जिसका उन्हें फायदा मिल रहा है.

कॉलेज के दिनों में ही उनके राजनीतिक करियर की नींव पड़ी. 1987 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के महासचिव का पद संभाला. बाद में उन्हें पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया.

आतिशी मार्लेना (AAP)
पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं आतिशी मार्लेना के बारे में कहा जाता है कि राजनीति में आने से पहले वे एक होनहार स्टूडेंट और बेहतरीन टीचर रह चुकी हैं. वे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की सदस्या हैं और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रह चुकी हैं.

आप की आतिशी लड़ाई को त्रिकोणीय करने की कोशिश में लगी है. आतिशी दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रही हैं और पिछले साल ही जनता के बीच रह रही हैं.

2014 में बीजेपी ने जीतीं थी सभी लोकसभा सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीती थीं और केंद्र में मोदी की सरकार बनी थी तो 2009 में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस के प्रति अपना विश्वास जताया था और सातों सीटें पार्टी की झोली में दी थी.

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस सीट से बीजेपी ने महेश गिरी को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था. वे बीजेपी के भरोसे पर खरा उतरे और इस सीट से संदीप दीक्षित को पराजित करते हुए कमल का फूल खिलाया. वहीं इस सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार राज मोहन गांधी भी चुनाव मैदान में थे. उन्हें भी महेश गिरी के सामने हार का मुंह देखना पड़ा.

लोकसभा चुनाव की बात करें तो दिल्ली के मतदाताओं ने अपना पुराना पैटर्न बरकरार रखा. 2014 में देश की तरह दिल्ली में मोदी लहर देखने को मिला. दिल्ली की सभी सातों सीटें कांग्रेस के कब्जे से चली गईं और बीजेपी के खाते में आईं. नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने.

साल 2013 में ही दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी दस्तक दे चुकी थी, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में AAP कोई भी छाप छोड़ने में नाकाम रही.

ये संसदीय क्षेत्र 1966 में अस्तित्व में आया. वर्तमान में, इस क्षेत्र में दिल्ली नगर निगम के 40 वार्ड शामिल हैं। इस क्षेत्र में कुल 18,29,578 मतदाता हैं, जिसमें 10,23,325 पुरुष और 8,06,253 महिला मतदाता हैं. इस सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक और दिलचस्प होने जा रहा है.

2008 में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद से, इस क्षेत्र के अंतर्गत कोंडली, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, कृष्णा नगर, गांधी नगर, शाहदरा और जंगपुरा विधानसभा सीटें आती हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीती थीं और केंद्र में मोदी की सरकार बनी थी तो 2009 में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस के प्रति अपना विश्वास जताया था और सातों सीटें पार्टी की झोली में दी थी.

Trending Tags- Loksabha Election 2019 | Election 2019 | Modi | Gautam Gambhir | Aaj Ka Samachar

  • लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने महेश गिरी का टिकट काटकर क्रिकेटर गौतम गंभीर को चुनाव मैदान में उतारा है
  • कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली उनको कठिन चुनौती दे रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने आतिशी को मैदान में उतारा है

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 59 सीटों पर 12 मई को मतदान होगा. इनमें देश की राजधानी दिल्ली की सभी 7 सीटें भी शामिल हैं. यहां हर सीट पर दिलचस्प मुकाबला है. दिल्ली में सबसे ज्यादा रोमांच ईस्ट दिल्ली लोकसभा सीट पर है.

इस बार के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने महेश गिरी का टिकट काटकर क्रिकेटर गौतम गंभीर को चुनाव मैदान में उतारा है. कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली उनको कठिन चुनौती दे रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने आतिशी को मैदान में उतारा है.

गौतम गंभीर (BJP) गौतम गंभीर को सेलेब्रिटी होने का फायदा मिल रहा है, तो उनके सामने एक कठिनाई भी खड़ी हो रही है. वो जनता से सीधे कनेक्ट नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि क्रिकेट के पिच पर अपना जलवा दिखने वाले गौतम गंभीर को इस सीट से जीत मिलती है या नहीं.

अरविंदर सिंह लवली (CONGRESS)
अरविंदर सिंह लवली एक युवा राजनेता हैं. उनकी गिनती दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) के सबसे ज्यादा करीबियों में होती है. अरविंदर सिंह लवली राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं, वो कई बार विधायक रह चुके हैं. जनता के बीच में किस तरह से जाया जाता है, उन्हें ये बखूबी पता है. जिसका उन्हें फायदा मिल रहा है.

कॉलेज के दिनों में ही उनके राजनीतिक करियर की नींव पड़ी. 1987 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के महासचिव का पद संभाला. बाद में उन्हें पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया.

आतिशी मार्लेना (AAP)
पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं आतिशी मार्लेना के बारे में कहा जाता है कि राजनीति में आने से पहले वे एक होनहार स्टूडेंट और बेहतरीन टीचर रह चुकी हैं. वे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की सदस्या हैं और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रह चुकी हैं.

आप की आतिशी लड़ाई को त्रिकोणीय करने की कोशिश में लगी है. आतिशी दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रही हैं और पिछले साल ही जनता के बीच रह रही हैं.

2014 में बीजेपी ने जीतीं थी सभी लोकसभा सीट 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीती थीं और केंद्र में मोदी की सरकार बनी थी तो 2009 में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस के प्रति अपना विश्वास जताया था और सातों सीटें पार्टी की झोली में दी थी.

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस सीट से बीजेपी ने महेश गिरी को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था. वे बीजेपी के भरोसे पर खरा उतरे और इस सीट से संदीप दीक्षित को पराजित करते हुए कमल का फूल खिलाया. वहीं इस सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार राज मोहन गांधी भी चुनाव मैदान में थे. उन्हें भी महेश गिरी के सामने हार का मुंह देखना पड़ा.

लोकसभा चुनाव की बात करें तो दिल्ली के मतदाताओं ने अपना पुराना पैटर्न बरकरार रखा. 2014 में देश की तरह दिल्ली में मोदी लहर देखने को मिला. दिल्ली की सभी सातों सीटें कांग्रेस के कब्जे से चली गईं और बीजेपी के खाते में आईं. नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने.

साल 2013 में ही दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी दस्तक दे चुकी थी, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में AAP कोई भी छाप छोड़ने में नाकाम रही.

ये संसदीय क्षेत्र 1966 में अस्तित्व में आया. वर्तमान में, इस क्षेत्र में दिल्ली नगर निगम के 40 वार्ड शामिल हैं। इस क्षेत्र में कुल 18,29,578 मतदाता हैं, जिसमें 10,23,325 पुरुष और 8,06,253 महिला मतदाता हैं. इस सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक और दिलचस्प होने जा रहा है.

2008 में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद से, इस क्षेत्र के अंतर्गत कोंडली, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, कृष्णा नगर, गांधी नगर, शाहदरा और जंगपुरा विधानसभा सीटें आती हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीती थीं और केंद्र में मोदी की सरकार बनी थी तो 2009 में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस के प्रति अपना विश्वास जताया था और सातों सीटें पार्टी की झोली में दी थी.

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