“संसदीय समितियों को प्रभावी बनाने से जनप्रतिनिधियों की बढ़ेगी जबावदेही: Lok Sabha Speaker ओम बिरला”

  • संसदीय कमेटियां सदन का लघु रूप होती हैं और हर दल का सदस्य उस कमेटी का सदस्य होता है. हर मुद्दे पर कमेटी में खुलकर चर्चा होती है
  • विदेशों में सत्र लंबे चलते हैं, लेकिन देश में लोकसभा और विधानसभाओं के सत्रों की संख्या घट रही है. इसलिए सभी सदस्यों को निर्णय लेने की आवश्यकता है

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसदीय समितियों को प्रभावी बनाने से जन प्रतिनिधियों की जबावदेही बढ़ेगी. संसदीय प्रणाली में संसदीय समितियों का अहम योगदान है.

संसदीय कमेटियां सदन का लघु रूप होती हैं और हर दल का सदस्य उस कमेटी का सदस्य होता है. हर मुद्दे पर कमेटी में खुलकर चर्चा होती है, जो बात सदन में नहीं हो पाती है. इससे लोकतंत्र में भरोसा बढ़ेगा. 

लोस अध्यक्ष ने बुधवार को हरियाणा विधानसभा में आयोजित विधायकों के प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा राज्य चित्रण का स्वरूप है यानि राज्य की हर जानकारी जनप्रतिनिधि के जरिये मिल सकती है और जनता की समस्याओं के बारे में भी सरकार को पता चलता है. 

लोस और विधानसभा में सत्र हंगामे की भेंट चढ़ने पर लोस अध्यक्ष ने चिंता जताते हुए कहा कि विदेशों से हमें सीख लेनी चाहिए, वहां सार्थक संवाद होता है, न कि हंगामा.

विदेशों में सत्र लंबे चलते हैं, लेकिन देश में लोकसभा और विधानसभाओं के सत्रों की संख्या घट रही है. इसलिए सभी सदस्यों को निर्णय लेने की आवश्यकता है कि तर्क-वितर्क, संवाद व बहस हो, लेकिन सत्र प्रभावित न हो, कम से कम एक घंटा तो सत्र बिना बाधित हुए चले. 

प्रीबजट पर चर्चा देश में अनोखी पहल

लोस अध्यक्ष ने हरियाणा विधानसभा में पहली बार प्री-बजट पर चर्चा को देश में अनोखी पहल बताया. इससे नई शुरूआत होगी और हरियाणा विधानसभा सभी राज्यों की विधानसभाओं के लिए आदर्श का काम करेगी. प्री-बजट में जनप्रतिनिधिन न केवल अपने सुझाव देंगे, बल्कि जनता की समस्याओं के अनुरूप बजट को बेहतर भी बनाया जा सकेगा. 

सदन के सत्रों पर नियंत्रण जरूरी

लोस अध्यक्ष ने कहा कि सदन के सत्रों में नियंत्रण जरूरी है. जन प्रतिनिधियों को जनता की आशाओं के अनुरूप आवाज को उठाना चाहिए. जब जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाएंगे तभी विश्वास और भरोसा बढ़ेगा.

जनप्रतिनिधियों को आवाज उठाने का पूरा समय मिले, इसके लिए सत्रों की संख्या बढ़ाना जरूरी है. विधानमंडलों में लंबी एवं सार्थक चर्चा हो और सत्र अधिकतम समय के लिए चलें, इस दिशा में काम करने की जरूरत है. 

हिन्दुस्थान समाचार/वेदपाल

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