बेगूसराय में जमीन से सस्ती है जान, हत्याकांडों से सहमे लोग

जमीन के लिए बीस दिन में दस की लोगों की हत्या

बेगूसराय में बंदूकों की गरज रोकने के लिए शासन-प्रशासन की सारी कवायद फेल हो गई है. यहां बात-बात पर गोलीबारी आम बात हो गई है. सबसे अधिक गोली जमीन विवाद को लेकर चल रही है. गांव में पंचायत की परिपाटी समाप्त होने और पंच-सरपंच के प्रपंच में पड़ने के कारण सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है. भाईचारा तो समाप्त ही हो गया है जिसके कारण बीते 20 दिनों में यहां दस लोगों की हत्या हो चुकी है.

हालांकि, एसपी के नेतृत्व में हत्याओं के उद्भेदन का सिलसिला तेजी से जारी है. 14 अक्टूबर को चेरिया वरियारपुर थाना क्षेत्र के खांजहांपुर में जमीन विवाद को लेकर चचेरे भाई ने मुकेश सिंह और मुुुकेश की मां आंगनबाड़ी सहायिका उषा देवी की घर में घुसकर धारदार हथियार से हत्या कर दी जबकि मुकेश कुमार की पत्नी रत्ना देवी गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण कर जीवन -मौत से संघर्ष कर रही है.

27 अक्टूबर की रात जब लोग दीपावली मना रहे थे तो सिंघौल ओपी क्षेत्र के मचहा गांव में घर में घुसकर अपराधियों ने पति, पत्नी और बेटी को गोलियों से भून डाला. वहां विकास कुमार सिंह ने जमीन के लिए अपने भाई कुणाल कुमार सिंह, उसकी पत्नी कंचन देवी एवं पुत्री सोनम कुमारी की हत्या कर दी.

बदमाश की गोली खत्म हो जाने के कारण कुणाल कुमार सिंह के पुत्र शिवम कुमार और सत्यम कुमार की जान बच गई. पांच नवम्बर की शाम बछवाड़ा थाना क्षेत्र के चमथा दियारा में करीब दो बीघा जमीन पर कब्जा के लिए 50 राउंड से अधिक गोली चली। दो पक्षों के बीच हुई. इस गोलीबारी में अमरजीत राय, नागेंद्र राय एवं शीला देवी की मौत हो गई.

वहीं, दोनों पक्षों के चार लोगों के साथ एक बेकसूर राहगीर भी गोली लगने से जख्मी हो गया जिसके बाद गांव में कोहराम मचा है तथा स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. एसपी अवकाश कुमार खुद रात भर हत्यारों को पकड़ने के प्रयास में लगे रहे.

हत्याकांडों से लोग सहमे हुए हैं, वे पुलिस के प्रति आक्रोश जता रहे हैं. लेकिन जमीन विवाद में हो रही हत्याओं के मामले में पुलिस से अधिक राजस्व कर्मचारी, सीओ और अंचल कार्यालय के स्टॉफ दोषी हैं. पंचायत राजस्व कार्यालय से लेकर अंचल कार्यालय तक, डीसीएलआर कार्यालय से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक भ्रष्टाचार आकंठ इस कदर डूबे हैंं जिसका अंदाजा और खुलासा सीबीआई को छोड़ कोई नहीं कर सकता है.

तमाम अंचल एवं राजस्व कार्यालय में सिर्फ और सिर्फ दलालों के माध्यम से ही काम हो पाता है. दियारा के निवासी प्रभाकर कुमार राय कहते हैं कि ऐसी घटना आत्म चिंतन के लिए मजबूर कर रही है कि भूमि विवाद में यह खूनी खेल कब तक चलता रहेगा. विश्वास के अभाव में सामाजिक अनुशासन टूटता है तो मरने – मारने पर लोग उतारू हो जाते हैं. गांव में पंचायत की परिपाटी समाप्त होने और पंच के प्रपंच में पड़ने के कारण सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है.

ऐसे में पुलिस की जवाबदेही बढ़ती है, लेकिन मानवाधिकार के डंडे का भय और धन कुबेर बनने की कुछ वर्दीधारी की कारगुजारी की वजह से पुलिस की भी विश्वसनीयता अब दो दशक पहले वाली नहीं है. लिहाजा हल उठाने वाला हाथ कभी -कभी हथियार उठा लेता है. सांसद प्रतिनिधि अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि पुलिस को बढ़ते अपराध के मद्देनजर अपनी कार्यप्रणाली तथा थानाध्यक्ष के बारे में जमीनी समीक्षा करनी चाहिए.

अपराधियों में पुलिस का खौफ तथा आमलोगों में उसके प्रति विश्वास पुलिसिंग की प्रथम एवं आवश्यक शर्त है. हम समाज के किस मोड़ पर खड़े हैं, जमीन के विवाद में रिश्तों-नातों के खून का अनवरत सिलसिला कोई यह कहकर नहीं बच सकता है. पुलिस का खौफ कानून तोड़ने वालों में होना चाहिए, जो नहीं है.


हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/विभाकर

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