इस वजह के चलते लॉ टॉपर ने CJI से मेडल लेने से किया इनकार

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक लॉ टॉपर की काफी चर्चा हो रही है. दरअसल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली की लॉ टॉपर सुरभि कारवा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से गोल्ड मेडल लेने से मना कर दिया. सुरभि ने चीफ जस्टिस पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप निपटाने के तरीके से असंतुष्ट होकर ऐसा कदम उठाया है.

शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में लॉ टॉपर सुरभि कारवा को दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल दिया जाना था पर सुरभि इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई. कारवा ने कहा कि चीफ जस्टिस पर महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन शोषण (sexual abuse case) के आरोप के केस को जिस तरीके से निपटाया गया, वो उसके विरोध में हैं.

सुरभि ने मीडिया इंटरव्यू में कहा, ”मैंने जो कुछ भी सीखा है, उसने मुझे पिछले कुछ हफ्तों में एक नैतिक प्रश्न में डाल दिया कि क्या मुझे CJI गोगोई से पुरस्कार मिलना चाहिए. वो जिस संस्थान के प्रमुख हैं वो तब फेल हो गया जब उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे.”

उन्होंने साफ कहा कि उन्हें पुरस्कार लेने से कोई समस्या नहीं थी. वो केवल इसे सीजेआई के हाथ से नहीं लेना चाहती थीं.

सुरभि ने अपनी मास्टर्स डिग्री के लिए संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता हासिल की है और उनका शोध संविधान सभा की बहस की एक नारीवादी आलोचना है. अपने शोध में वो इस सवाल की पड़ताल कर रही हैं कि ‘क्या संविधान एक नारीवादी दस्तावेज है?’.

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के संरक्षक हैं CJI

सीजेआई दिल्ली के नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के संरक्षक हैं और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चांसलर हैं. पिछले साल सीजेआई दीपक मिश्रा को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था.

क्या था पूरा मामला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने शीर्ष अदालत के 22 जजों को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने अक्टूबर 2018 में उनका यौन उत्पीड़न किया था.

35 साल की ये महिला अदालत में जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के पद पर काम कर रही थीं. महिला का आरोप था कि चीफ जस्टिस द्वारा उसके साथ किए गए आपत्तिजनक व्यवहार का विरोध करने के बाद पहले तो उसका स्थानांतरण कर दिया गया और बाद में एक प्रशासनिक जांच के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था.

इसकी जांच तीन सदस्यीय इन-हाउस समिति के सदस्यों को सौंपी गई थी जिन्होंने 6 मई को सीजेआई को मामले में क्लीन चिट दे दी थी.

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