10 साल बाद झारखंड की बेटी ने भारत को विश्व तीरंदाजी यूथ चैंपियनशिप में दिलाया गोल्ड

भारतीय खिलाड़ी खेल के हर मैदन में अपना परचम लहरा रहे हैं. एक तरफ जहां वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में पीवी सिंधु ने फाइनल में जीत दर्ज की, तो दूसरी तरफ विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप में भारत की तीरंदाज कोमालिका बारी ने गोल्ड पर कब्जा किया.

विश्व युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप के रिकर्व कैडेट वर्ग में भारतीय तीरंदाज कोमालिका बारी ने जापान की सोनोदा वाका को हराया. 17 साल की कोमालिका अंडर-18 वर्ग में विश्व चैंपियन बनने वाली भारत की दूसरी तीरंदाज बन गई हैं. इससे पहले साल 2009 में दीपिका कुमारी ने ये खिताब जीता था.

बता दें कि इस महीने की शुरुआत में विश्व तीरंदाजी ने भारत को निलंबित करने का फैसला किया था. जिसके हटने तक अब कोई भी भारतीय तीरंदाज देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा. विश्व तीरंदाजी से निलंबन लागू होने से पहले भारत ने अपनी आखिरी प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक के साथ अभियान का समापन किया था.

भारतीय तीरंदाजों ने शनिवार को मिश्रित जूनियर युगल स्पर्धा में स्वर्ण और शुक्रवार को जूनियर पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य जीता था.

झारखंड की बेटी कोमालिका का कमाल

जमशेदपुर की टाटा तीरंदाजी अकादमी की खिलाड़ी कोमालिका ने 2012 में आइएसडब्ल्यूपी (तार कंपनी) तीरंदाजी सेंटर से अपने करियर की शुरुआत की थी. कोमालिका के यहां तक का सफर आसान नहीं रहा.

साधारण परिवार की कोमालिका के पिता LIC एजेंट हैं और मां लक्ष्मी बारी आंगनबाड़ी सेविका हैं. अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के लिए उनके परिवार को काफी आर्थिक तंगी तक का सामना करना पड़ा पर उन्होंने हर कदम पर बेटी का साथ दिया. आज उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है.

द्रोणाचार्य पूर्णिमा महतो और धर्मेंद्र तिवारी जैसे दिग्गज प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में कोमालिका का सफर शुरू हुआ और महज तीन सालों के अंदर वो कैडेट वर्ल्ड चैंपियन के रूप में उभरकर सामने आईं.

कोमालिका अभी तक के करियर में लगभग डेढ़ दर्जन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं. अब झारखंड की तीरंदाजी में उसे ओलंपियन दीपिका कुमारी के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है.

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