जानिए कैसा रहता है गलवान घाटी का मौसम, इतनी ठंड में रहते हैं सैनिक

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नई दिल्ली. लद्दाख से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गलवान घाटी में 15 और 16 जून की रात को हुई खूनी झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए. इस झड़प में चीन का भी बड़ा नुकसान हुआ है. बड़ी तादाद में चीन के PLA सैनिक हताहत हुए हैं.

इस झड़प में एक भी गोली नहीं चली. इस दौरान सैनिकों ने लाठी-डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया था. अब बात करते हैं गलवान घाटी की जहां पर ये खूनी संघर्ष हुआ. यहां का कैसा मौसम है और कैसे सैनिक अपने आप को सर्वाइव करते हैं.

तापमान रहता है शून्य से नीचे- दोनों देशों के बीच जहां पर हिंसक झड़प हुई, उसकी ऊंचाई करीब 14 हजार फीट है और वहां पर तापमान शून्य से भी नीचे रहता है.

  • यहां का मौसम जानलेवा होता है.
  • ये क्षेत्र दुनिया का सबसे मुश्किल युद्ध क्षेत्र माना जाता है.
  • ये वो इलाका है जहां भीषण गर्मी के मौसम में भी तापमान शून्य या उससे नीचे रहता है.

लद्दाख और गलवान के तापमान में रहता है अंतर- गलवान घाटी और लद्दाख के शहरी इलाकों के तापमान में जमीन आसमान का अंतर होता है. गलवान घाटी में तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस से नीचे है. जबकि लद्दाख के शहरी इलाकों में तापमान 12 डिग्री के आसपास रहता है.

तूफान और हिमस्खलन का करना पड़ता है सामना- वहीं साल के अंत या शुरूआती महीने में यानी दिसंबर-जनवरी के महीनों में गलवान घाटी का तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है. भीषण ठंड में भी भारतीय सेना के जवान सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं. जवानों को बर्फीले तूफान और हिमस्खलन का सामना करना पड़ता है.

खास तकनीक की दी जाती है किट- यहां पर तैनात रहने वाले जवानों को खास तकनीक से बनी किट दी जाती है. जो इस जानलेवा मौसम में भी जवानों को जिंदा रखने में मदद करती है. इस किट में थर्मल इंसोल, चश्मे, सोने के लिए किट, कुल्हाड़ी, जूते, हिमस्खलन पता लगाने वाले यंत्र और पर्वतारोहण का सामान शामिल होते हैं.

चीन करना चाहता है भारत की जमीन पर सामरिक निर्माण-चीन गलवान घाटी में भारत के निर्माण को गैर-कानूनी कह रहा है, क्योंकि भारत-चीन के बीच एक समझौता हुआ है कि एलएसी को मानेंगे और उसमें नये निर्माण नहीं करेंगे. लेकिन, चीन वहां पहले ही जरूरी सैन्य निर्माण कर चुका है और अब वो मौजूदा स्थिति बनाये रखने की बात कर रहा है. अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अब भारत भी वहां पर सामरिक निर्माण करना चाहता है.

बॉर्डर पर बढ़ाई गई सेना- भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ता देख उत्तराखंड के बॉर्डर पर सेना बढ़ाई गई है. उत्तराखंड में करीब 345 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा है. दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है. 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के दौरान भी गलवान घाटी लड़ाई का मैदान बन गयी थी.