अच्छी फसल की कामना के लिए की जाती है कर्म पूजा, जानिए पूजा महत्व और विधि

कोलकाता. आज कर्म पूजा का पर्व है. ये पर्व अच्छी फसल की कामना के लिए मनाया जाता है. ये पर्व ज्यादातर बंगाल, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार है.

इस समय मनाया जाता है ये त्योहार

ये त्योहार मुख्य रूप से भादो मास की एकादशी के दिन मनाया जाता है. लगभग सिंतबर के समय ये त्योहार मनाया जाता है. लोग बड़ी ही श्रृद्धा के साथ इस पर्व को मनाते हैं

इस दिन की जाती है प्रकृति की पूजा

इस मौके पर लोग प्रकृति की पूजा कर अच्छे फसल की कामना करते हैं, साथ ही बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं.

इस दिन लोग ढोल और मांदर की थाप पर झूमते हैं

करमा पर झारखंड के लोग ढोल और मांदर की थाप पर झूमते-गाते हैं. ये दिन इनके लिए प्रकृति की पूजा का है. ऐसे में ये सभी उल्लास से भरे होते हैं. परम्परा के मुताबिक, खेतों में बोई गई फसलें बर्बाद न हों इसलिए प्रकृति की पूजा की जाती है.

पूजा विधि

इस मौके पर एक बर्तन में बालू भरकर उसे बहुत ही कलात्मक तरीके से सजाया जाता है. पर्व शुरू होने के कुछ दिनों पहले उसमें जौ डाल दिए जाते हैं. इसे ‘जावा’ कहा जाता है. यही जावा बहनें अपने बालों में गूंथकर झूमती-नाचती हैं.

बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए इस दिन व्रत रखती हैं. इनके भाई ‘करम’ वृक्ष की डाल लेकर घर के आंगन या खेतों में गाड़ते हैं.

इसे वे प्रकृति के आराध्य देव मानकर पूजा करते हैं. पूजा समाप्त होने के बाद वे इस डाल को पूरे धार्मिक रीति‍ से तालाब, पोखर, नदी आदि में विसर्जित कर देते हैं.

कर्म पूजा पर मुख्यमंत्री ममता ने दी शुभकामनाएं

पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुभकामनाएं दी है. मुख्यमंत्री ने इस बारे में ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा कि आज देशभर में कर्म पूजा का त्यौहार मनाया जा रहा है. इस मौके पर मैं सभी को शुभकामनाएं दे रही हूं.

झारखंड के पूर्व CM-हेमंत ने भी दी बधाई

हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश

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