कारगिल दिवस विशेष: कारगिल शहीद का बेटा सेना में बना अधिकारी

HS (5)
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  • चंबा के कोट मनियार निवासी सौरभ ने माता-पिता के सपनों को किया साकार, दादा और पिता की राह पर बेटा

टिहरी जिले के चंबा ब्लाक के ग्राम कोट पट्टी मनियार के लेफ्टिनेंट सौरभ चन्द रमोला में देशसेवा का जज्बा बच्चपन से ही कूट-कूट कर भरा था. उनके दादा अमर चन्द रमोला गढ़वाल राइफल में रहे. उनके पिता राजेन्द्र चन्द रमोला भी गढ़वाल राइफल में सूबेदार थे. जब कारगिल में उनके पिता शहीद हुए उस वक्त सौरभ महज चार वर्ष के थे. इसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी उनकी मां विमला देवी के सिर पर आ गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना सारा जीवन बच्चों की शिक्षा -दीक्षा पर लगा दिया. विमला देवी कारगिल दिवस (26 जुलाई) की पूर्व संध्या पर पति को याद करते और बेटे को सैन्य अफसर के रूप में देखकर भावुक हो गईं.

सौरभ अपने घर मे छह बहनों के सबसे छोटे इकलौते भाई हैं. सौरभ की प्रारंभिक शिक्षा चंबा में हुई. उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा आईसीसी बोर्ड से 97 प्रतिशत अंकों के साथ समरवैली स्कूल देहरादून से उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्हें नेशनल डिफेंस एकेडमी में टेक्निकल बेस पर एंट्री मिली. चार साल की कठिन मेहनत एवं लगन के बूते वे 7वीं गढ़वाल राइफल में 2018 में लेफ्टिनेंट बने.

विमला कहती हैं कि कारगिल को वह कभी नहीं भूल सकतीं. इस लड़ाई में उन्होंने पति को ही नहीं और बहुत कुछ खो दिया पर हिम्मत नहीं हारी. वह बेटे को सैन्य अफसर के रूप में देखकर संतोष कर लेती हैं. उन्हें नाज है कि उनका बेटा अपने पिता जैसा जांबाज अफसर है. उसने भी भारत मां की रक्षा का संकल्प लिया.

हिन्दुस्थान समाचार/प्रदीप डबराल