कानपुरः टिड्डी दल को लेकर किसानों में बढ़ी बेचैनी, आलाधिकारी दे रहे सलाह

कानपुर, यूपी।

पाकिस्तान से चला टिड्डी दल इन दिनों उत्तर प्रदेश के राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा में जा पहुंचा है. ऐसे में संभावना है कि अगर दक्षिणी हवाएं चली तो यह दल दोआबा यानी गंगा यमुना के बीच के जनपदों में दस्तक दे देगा. ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़ जाएगी और उनकी फसलें चट हो जाएंगी.

इसी को देखते हुए किसानों में बेचैनी बढ़ी हुई है तो वहीं आलाधिकारी भी किसानों को बराबर सलाह दे रहे हैं और नजर रखे हुए हैं. राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश की सीमा उत्तर प्रदेश में टिड्डी दल की दस्तक और पड़ोसी जनपदों में दिखते प्रभाव ने जिले के किसानों की बेचैनी बढ़ा दी है. जहां टिड्डी दल को लेकर किसान चिंतित है, वहीं जिला प्रशासन भी किसानों के लिए एडवाइजरी जारी कर चुका है.

जिला प्रशासन के निर्देश पर सीडीओ ने दल को उतरने से रोकने और उतरने के बाद किसानों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां बताई हैं. जिससे टिड्डी दल से कम से कम फसलों को नुकसान हो सके. जनपद में इन दिनों खेतों में मक्का, बाजरा के साथ ही पालेज व हरी सब्जियों की फसलें हैं.

डीएम ने जारी किया अलर्ट

राजस्थान के बाद टिड्डी दल का आसपास के जनपदों में भी प्रभाव दिखाई देने लगा है. टिड्डी दल के हमले से फसलों को सर्वाधिक नुकसान की जानकारी दिए जाने की वजह से जनपद के किसान चिंतित हैं. वहीं प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर दिया है.

डीएम डा. बीडीआर तिवारी के निर्देश पर सीडीओ सुनील कुमार सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों को टिड्डी दल को लेकर जनपद में हर समय सतर्क रहने को कहा है. वहीं किसानों को टिड्डी से अपनी फसलों को बचाने के लिए उपाय भी बता रहे हैं. टिड्डी के खेतों के ऊपर होने और खेतों में उतरने पर किए जाने वाले कार्यों के बारे में बताया है, जिससे जिले में फसलें कम प्रभावित हो सकें और किसानों को अधिक नुकसान न उठाना पड़े.

यह उपाय करने की दी गयी सलाह

टिड्डी दल अभी उत्तर प्रदेश की जिस सीमाओं पर रुका हुआ है वहां पर किसानों को अधिक नुकसान नहीं है, क्योंकि इन दिनों बुन्देलखण्ड सहित उन क्षेत्रों में अधिक फसलें नहीं है. यह अलग बात है कि झांसी व उरई के जनपदों में किसान सब्जी की फसलें करते हैं और उनको नुकसान हो सकता है. वहीं दोआबा क्षेत्र में लगभग हर किसान इन दिनों गर्मी की फसलें बोये हुए हैं. इसी को लेकर किसान से लेकर आलाधिकारी भी चिंतित हैं.

सीडीओ ने कहा कि टिड्डी दल के प्रकोप की जानकारी किसान प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के कर्मचारियों, ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग को दें. शोर से टिड्डी दल खेतों में आक्रमण नहीं कर पाती है, इसलिए ढोल, पटाखे, थालियां बजाएं, फसल के चारो ओर मशाल जलाएं.

उन्होंने कहा कि यदि किसी खेत में फसलों पर टिड्डी दिखें तो सुबह ही फसल की जुताई करा दें और पानी भर दें. जैविक नियंत्रण के रूप में ब्यूवेरिया बेसियाना की ढाई किग्रा मात्रा सात सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत, धूल की 25 से 30 किग्रा मात्रा को प्रति हेक्टेअर की दर से बुरकाव करें.

हिन्दुस्थान समाचार/अजय

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