मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत को पद्मश्री मिला

  • मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत की पहचान के साथ अब पद्मश्री भी जुड़ चुकी है. एक दिन पहले ही भारत सरकार ने उनके नाम का ऐलान किया है.
  • चमोली जिले के बैनोली गांव स्थित कल्याण सिंह रावत के पैतृक गांव बैनोली में जश्न का माहौल है. देहरादून में नथुवावाला में रावत के घर पर भी यही स्थिति है.

देहरादून, उत्तराखंड।

चमोली जिले के बैनोली गांव स्थित कल्याण सिंह रावत के पैतृक गांव बैनोली में जश्न का माहौल है. देहरादून में नथुवावाला में रावत के घर पर भी यही स्थिति है. घर पहुंचने वालों का तांता लगा है और फोन पर भी बधाइयों का निर्बाध सिलसिला चल रहा है. 

मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत की पहचान के साथ अब पद्मश्री भी जुड़ चुकी है. एक दिन पहले ही भारत सरकार ने उनके नाम का ऐलान किया है. मांगलिक कार्यों के मौके पर उनके मैती आंदोलन की लोकप्रियता का यह आलम है कि तमाम जगहों पर शादी के निमंत्रण कार्ड में बकायदा मैती कार्यक्रम छपा मिलता है. इस कार्यक्रम में वर-वधू मिलकर पौधा रोपते हैं.

रावत ने 1995 में इस अनूठे अभियान की शुरूआत की. पहले पहले चमोली जिले के कुछ स्थानों पर मैती आंदोलन लोगों की नजर में आया. इसके बाद यह उत्तराखंड से लेकर अन्य स्थानों तक पहुंच गया. रावत के मुताबिक कई राज्यों और विदेश तक में मैती कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. गढ़वाली शब्द मैती मैत से बना है. 

मैत के मायने मायके से है और मैती का मतलब मायकेवाले हैं. इस अभियान में वर-वधू के स्तर पर लगाए गए पौधों को उसके मायके वाले पोषित करते हैं. ताकि उसकी चिर स्मृति बनी रहे. पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित इस अभियान के तहत पांच लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं.

पद्मश्री मिलने से रावत बेहद खुश हैं. पद्मश्री को वह पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का बेहतर इनाम मानते हैं. बकौल, रावत-उन्होंने पद्म पुरस्कार के लिए आवेदन नहीं किया था. उनके किसी शुभचिंतक ने उनके नाम को आगे भेज दिया था. उन्हें कल भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अफसर का फोन आया, जिसने पद्मश्री मिलने की जानकारी दी गई. पद्मश्री मिलना पूरी तरह से अप्रत्याशित रहा है. गौरान्वित महसूस कर रहा हूं.

प्रधानमंत्री चिट्ठी लिखकर पीठ थपथपा चुके हैं

बकौल कल्याण सिंह रावत कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक चिट्ठी उन्हें मिली थी. इसमें मोदी ने लिखा था कि उन्हें मैती आंदोलन की जानकारी हुई है. इस अभियान को इसी तरह से जारी रखें. रावत के अनुसार हिमाचल और गुजरात सरकार के पत्र भी उन्हें प्राप्त हुए हैं, जिसमें उन्होंने मैती आंदोलन की तर्ज पर अपने यहां कार्यक्रम चलाने की जानकारी दी है.

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हिन्दुस्थान समाचार/विशेष संवाददाता

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