लक्ष्मी विलास पैलेस होटल विनिवेश मामला: ज्योत्सना, गुहा और कर्मसे CBI कोर्ट में पेश

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जोधपुर, 08 अक्टूबर (हि.स.). उदयपुर के प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल के विनिवेश के मामले में भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सूरी, लाजार्ड इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली के तत्कालीन प्रबंध निदेशक आशीष गुहा व कांतिलाल कर्मसे गुरुवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा के समक्ष पेश हुए.

इन सभी ने हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार अदालत में निर्धारित राशि के जमानती मुचलके पेश किए, जबकि विनिवेश मंत्रालय के पूर्व सचिव प्रदीप बैजल पेश नहीं हुए. उन्हें बुधवार को ही अग्रिम आदेश तक सीबीआई कोर्ट के समक्ष पेश होने से राहत मिल गई थी. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी को हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर तक सीबीआई कोर्ट के समक्ष पेश होने की छूट दे रखी है. मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को हाेगी.

सबसे पहले कांतिलाल कर्मसे और आशीष गुहा सीबीआई कोर्ट आए और जमानत मुचलके पेश करने की प्रकिया पूरी की. उन्होंने दो लाख का व्यक्तिगत मुचलका और दो गवाहों ने 1-1 लाख रुपये का मुचलका पेश किया. इसके बाद ठीक 12 बजे भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सूरी पेश हुई. सूरी ने पांच लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और दो गवाहों केशव सूरी व श्रद्धा सूरी ने ढाई-ढाई लाख रुपये के बॉन्ड पेश किए.

उल्लेखनीय है कि सीबीआई कोर्ट ने बीती 15 सितम्बर को प्रसंज्ञान लेते हुए सीबीआई कोर्ट की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था तथा 252 करोड़ रुपये के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को महज 7.50 करोड़ रुपये में बेचकर सरकार को 244 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सूरी, पूर्व आईएएस अफसर प्रदीप बैजल, आशीष गुहा व कांतिलाल कर्मसे के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे.

इसके अलावा इन सभी को तलब भी किया था. इन सभी ने सीबीआई कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी. हाई कोर्ट ने सूरी, बैजल, कर्मसे व गुहा की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें 8 अक्टूबर को सीबीआई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होने की छूट दे दी थी.

शौरी की ओर से पत्नी व बच्चे की तबीयत ठीक नहीं होने पर सीबीआई कोर्ट में उपस्थित होने से पूरी छूट देने का आग्रह किया गया था, लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार करते हुए 15 अक्टूबर तक कभी भी सीबीआई कोर्ट के समक्ष पेश होने की छूट दी थी.

वहीं पूर्व आईएएस अफसर बैजल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जज एस अब्दुल नजीर व बीआर गवई की बैंच ने सुनवाई करते हुए अग्रिम आदेश तक सीबीआई कोर्ट के समक्ष पेश होने से छूट दे दी थी. इसलिए वे पेश नहीं हुए. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति पेश की गई.

हिन्दुस्थान समाचार/सतीश/संदीप/बच्चन