दोस्ती में शोले के जय वीरू हैं सचिन और सिंधिया, अब पड़ेंगे गहलोत पर भारी

नई दिल्ली. ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जो कांग्रेस में अपनी अलग धमक रखते थे, इनमें से महाराज यानी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं तो दूसरे सचिन पायलट जो कि राजेश पायलट के बेटे हैं और राजनीति उनको विरासत में मिली है…कांग्रेस इन दोनों ही नेताओं को वो मुकाम नहीं दे पाई जिसके ये हकदार थे..

पार्टी में अपनी उपेक्षा से आहत होकर इन्होंने ऐसे कदम उठाए जो कांग्रेस के लिए जहर पीने जैसे रहा है….मौजूदा समय में राजनीतिक संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए भी अनुभव और युवा सोच ने मिलकर जीत की कई कहानियां लिखी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि युवा चेहरे ही पार्टी के साथ-साथ दिग्गज नेताओं की जड़ें हिला रहे हैं…..

मध्यप्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने युवा चेहरों यानी मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य और राजस्थान में सचिन पायलट को चेहरा बनाया था..लेकिन, कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद दोनों युवा नेताओं की उपेक्षा और नाराजगी की खबरें भी खूब आईं.. सिंधिया को न तो मुख्यमंत्री पद मिला और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद…

राजस्थान में पायलट को डिप्टी सीएम तो बनाया गया, लेकिन अक्सर गहलोत से उनकी खटपट की खबरें मीडिया में आती रहीं….सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के लिए उन राज्यों में चुनौती बनकर उभरे जहां मुख्य विरोधी बीजेपी हमेशा से मजबूत रही…इस तरह सिंधिया ने जहां कमलनाथ जैसे दिग्गज को कुर्सी से हटाने का काम किया, वहीं सचिन पायलट अब कांग्रेस के जमीनी नेताओं में शुमार अशोक गहलोत के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं. ..

सचिन पायलट के पुराने साथी और हालिया बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके समर्थन में उतर आए हैं… सचिन और महाराज की दोस्ती बहुत पुरानी है. कहा जाता है कि वो एक दूसके के काफी करीब है,… राजनीति में इनकी दोस्ती को शोले के जय वीरू की जोड़ी कहा जाता है.. सिंधिया ने बीजेपी ज्वाइन करने से पहले भी सचिन से दिल्ली में मुलाकात की थी…

कांग्रेस में रहते हुए सिंधिया और पायलट की जोड़ी की चर्चा खूब होती थी…दोनों कई मौकों पर एक साथ देखे जाते रहे हैं..आज जब वो बीजेपी में है तो अपने दोस्त सचिन के लिए खड़े हो गए हैं…ज्योतिरादित्य ने सचिन के पक्ष में ट्वीट करते हुए सीएम गहलोत पर आरोप भी लगाए हैं..

सिंधिया का कहना है कि कांग्रेस में काबिलियत की कोई अहमियत नहीं है….कांग्रेस से सचिन के बाग़ी हो जाने के कयासों को तब और हवा मिली जब रविवार को उन्होंने अपने करीबी और मध्यप्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका दे चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया से एक लंबी मुलाकात की..अगर गहलोत पर सरकार पर सियासी सर्जिकल स्ट्राइक होती है तो उसमें ज्योतिरादित्य की भूमिका को भी इंकार नहीं किया जा सकता….

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच शह-मात का खेल एक बार खुलकर सामने आ चुका है…लेकिन गहलोत और पायलट के बीच चल रही प्रतिद्वंद्विता कोई नई बात नहीं है… इससे पहले गहलोत और सीनियर पायलट यानि सचिन के पिता और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे राजेश पायलट के बीच में भी हमेशा छतीस का आंकड़ा रहा…

सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट ऐसे नेता थे, जिन्होंने कांग्रेस की शीर्ष लीडरशिप पर भी कई बार सवाल खड़े किए…लेकिन राजेश पायलट ने कभी पार्टी नहीं छोड़ी…पर अब दो दशक में हालात बदल चुके है जूनियर पायलट भी एक युवा नेता के रूप में अपनी अलग छवि बना चुके है….

क्या सचिन पायलट भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर चलेंगे और कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होंगे? हालांकि आखिरी फैसला सचिन पायलट को ही लेना है…

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