ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत आज, जानें पूजा से कैसे मिलेगा सुख-समृद्धि का वरदान

नई दिल्ली. हिंदू धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या को विशेष माना गया है. आज पूर्णिमा है और इस पूर्णिमा का हिंदु धर्म में काफी महत्व है. संयोग ये है कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी सोमवार के ही दिन पड़ी थी. 15 दिन बाद अब शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा भी सोमवार को पड़ रही है.

ये स्नान ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा. ज्येष्ठ मास की समापन पूर्णिमा को ज्येष्ठा नक्षत्र आना ज्योतिष की दृष्टि से बेहद शुभ माना गया है. ज्येष्ठ माह के शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को पड़ने वाला वट पूर्णिमा का व्रत मनाया जा रहा है.

जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा सोमवार को प्रभु जगन्नाथ के साथ भाई बलभद्र, सुभद्रा का विधि पूर्वक स्नान कराया गया. इसे लेकर जगन्नाथ मंदिर के अलावा शहर के दो दर्जन से अधिक मंदिरों में विशेष तैयारी की गई थी. सुबह से शाम तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

जहां 108 पवित्र जल स्रोतों के जल से स्नान कराकर छप्पन भोग का प्रसाद लगाया गया. वहीं शाम 6 बजे से देवेन्द्र नाथ बेहरा एवं अन्य कलाकार नृत्य वंदना की प्रस्तुति देंगे. इसके बाद रात 9 बजे महा आरती होगी और भगवान के मंदिर का पट 15 दिनों के लिए बंद हो जाएंगे.

वट पूर्णिमा व्रत महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में विशेष रूप से रखा जाता है, जबकि उत्तर भारत में ये व्रत वट सावित्री के रुप मे मनाया जाता हैं, जो ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ता है.

ऐसा माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थी. यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं.

मान्यता है कि अमावस्या और पूर्णिमा सोमवार को पड़ने से भगवान शिव और चंद्रमा दोनों प्रसन्न होते हैं. इन दोनों की कृपा धरतीवासियों को मिल जाती है. ज्येष्ठ पूर्णिमा से अगले दिन आषाढ़ मास प्रारंभ होगा, जिसका समापन 16 जुलाई को चंद्र ग्रहण के साथ होगा. वह पूर्णिमा मंगलवार को पड़ेगी. संयोग ये है कि आषाढ़ मास की अमावस्या भी मंगलवार को ही पड़ेगी.

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