जोधपुर: स्थाई लोक अदालत ने दिलाए आठ लाख रुपए

  • स्थाई लोक अदालत ने दिलाए आठ लाख रुपए
  • वाहन चोरी का मामले में बीमा कंपनी ने दावा खारिज किया था

जोधपुर, 08 नवंबर (हि.स.). स्थाई लोक अदालत ने पुलिस द्वारा वाहन चोरी की एफआईआर देरी से दर्ज किए जाने के आधार पर बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज किए जाने को विधि विरुद्ध बताते हुए अध्यक्ष ओमकुमार व्यास व सदस्य मगनलाल बिस्सा ने परिवाद मंजूर करते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को प्रार्थी को दावा राशि 8 लाख रुपए मय 9 फीसदी ब्याज व 10 हजार रुपए हर्जाना 30 दिन में देने का आदेश दिया.

मामले के अनुसार मोरा देवी ने अधिवक्ता अनिल भण्डारी के माध्यम से परिवाद पेश कर बताया कि उनकी बीमित बस 19 नवम्बर 2015 को बोरुंदा से जेतारण जाते वक्त देर शाम खराब हो गई और चालक भगवान राम ने बस को लॉक लगाकर सडक़ किनारे खड़ा कर दिया तथा दूसरे दिन वह मिस्त्री को लेकर पहुंचा तो पाया कि बस चोरी हो चुकी है.

चालक ने उसी दिन टाइप सुदा प्रथम सूचना रपट पुलिस में दी,लेकिन पुलिस ने रपट को 6 दिसम्बर को दर्ज किया. बीमा कंपनी ने उनका दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि एफआईआर घटना के 15 दिन बाद दर्ज कराई गई है.

अधिवक्ता भण्डारी ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने अन्वेषण के बाद अंतिम रपट लगाते हुए यह माना है कि बीमित बस चोरी हुई है, लेकिन चोर का सुराग नहीं लग पाया.बीमा कंपनी की ओर से कहा गया कि एफआईआर भी देरी से हुई है तथा गाड़ी को बिना सुरक्षा के छोड़ दिया गया था इसलिए दावा खारिज किया जाए. स्थाई लोक अदालत ने दोनों पक्षों को सुनकर आठ लाख रुपये देने के साथ दस हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया.

हिन्दुस्थान समाचार/सतीश / ईश्वर

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