जामिया मिल्लिया में छह वुमेन अचीवर्स ने सुनाई अपनी कहानी

दिल्ली का जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक समृद्ध विरासत को समेटे हुए है. इस यूनिवर्सिटी ने अब पर्यावरण के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाए हैं. पीएम मोदी के पर्यावरण बचाने को लेकर दिए गए संदेश के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति प्रोफसर नजमा अख्तर की पहल पर पौधारोपण अभियान की शुरआत की गई.

इस मौके पर प्रो. नजमा ने कहा, घर और सामज को मजबूत दिशा देने वाली महिला ही पर्यावरण बचा सकती है. महिलाएं सशक्त समाज के साथ जल संरक्षण और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहतर काम करती हैं, इसलिए जामिया इस अभियान में महिलाओं को शामिल कर रहा है.

कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने 6 महिलाओं को सम्मानित किया जिन्होंने कई तरह का संघर्ष कर अपने लक्ष्य को हासिल किया.

यूनिवर्सिटी कैंपस को हरा भरा बनाना है लक्ष्य

हॉटीकलचर विभाग और सरोजनी नायडू सेंटर फॉर विमेन स्टडीज ने यूनिवर्सिटी कैंपस को हरा भरा बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधे लगाने का अभियान चलाया है. इसके लिए कैंपस के 200 एकड़ की जमीन पर करीब 1200 पौधे लगाए जाएंगे. इसमें नीम, आशोका, अमलतास, गुलमोहर जैसे कई छांव देने वाले पौधे शामिल हैं.

छह वुमेन अचीवर्स को मिला सम्मान

इस मौके पर यूनिवर्सिटी ने अलग अलग क्षेत्र की छह वुमेन अचीवर्स को अपने अनुभवों को शेयर करने के लिए आमंत्रित किया. इसमें पर्वतारोही संतोष यादव, मेवात से पहली मुस्लिम महिला पोस्टग्रेजुएट मोहम्मदी, एक्टिविस्ट और एनजीओ आरोहन की संस्थापक रानी पटेल, भारतवर्ष 9 की एंकर स्मिता शर्मा, वॉइस ऑफ अमेरिका की इंडिया रिप्रेजेंटेटिव रितुल जोशी और हिन्दुस्थान सामाचार के डिजिटल प्लैटफॉर्म HS news की एग्जिक्यूटिव एडिटर प्रतिभा ज्योति भी शामिल हुईं.

इन सभी वुमेन अचीवर्स ने अपने अपने क्षेत्रों में सफलता की कहानियों के बारे में बताया. साथ ही उन्हें वहां तक पहुंचने में कितना संघर्ष करना पड़ा, इस बारे में भी उन्होंने बताया. इसके अलावा सभी ने पृथ्वी पर बिगड़ते पर्यावरण पर अपने विचार रखे.

पर्वतारोही संतोष यादव

हरियाणा के रेवाड़ी के एक छोटे से गांव की पर्वतारोही संतोष यादव ने बताया कि बचपन से ही उन्हें लड़का और लड़की का भेदभाव झेलना पड़ा. पढ़ाई के साथ साथ वो पर्वतारोही के क्षेत्र में गईं तो डॉक्टर ने उन्हें फेल कर दिया था पर उनका मकसद केवल एक था कि उन्हें हिमालय देखना है. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए भी काफी महत्वपूर्ण बातें बताईं.

पहली मुस्लिम महिला पोस्टग्रेजुएट मोहम्मदी

मोहम्मदी जामिया की पूव छात्रा रही हैं. साल 1984 से 1987 के बीच उन्होंने वहां पढ़ाई की और इतिहास में पोस्टग्रेजुएशन किया. वो पहली मुस्लिम महिला पोस्टग्रेजुएट हैं. उन्होंने बताया कि मेवात को सरकार ने भी सबसे पिछड़ा गांव घोषित किया था. उन्हें स्कूल तक जाने के लिए काफी दूर तक पैदल जाना पड़ता था, खेत में भी काफी काम किया.

एनजीओ आरोहन की संस्थापक रानी पटेल

आरोहन नाम के एनजीओ की संस्थापक रानी पटेल भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं. रानी पटेल ने सामज के वंचित बच्चों और मुश्किल हालात में जीवन बिताने वाली महिलाओं के लिए काम किया है.

एंकर स्मिता शर्मा

स्मिता शर्मा भारत में एक स्वतंत्र वरिष्ठ पत्रकार और एंकर हैं जो इस भारतवर्ष 9 से जुड़ी हुई हैं. स्मिता ने बताया कि वो पश्चिम बंगाल के आसनसोल से हैं जिसका जिक्र इन दिनों राजनीति में काफी हुआ है. उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलना जरूरी है कि महिलाओं को राजनीति की समझ नहीं होती इसलिए इन धारणा को तोड़ना जरूरी है.

रितुल जोशी

रितुल जोशी की पत्रकारिता का अंदाज़ हमेशा से ही अलग रहा है. इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि वो बहुत ही पढ़े लिखे परिवार से आती हैं जहां लड़का हो चाहे लड़की सबको पढ़ने का मौका मिलता है. पर दिक्कत तब आती थी जब कैरियर के ऑप्शन कम होते थे. लड़कियों के लिए डॉक्टर और लड़कों के लिए इंजीनियरिंग, बस यही पेशा चुनने के लिए कहा जाता था. उनके लिए पत्रिकारिता में आना भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा. हालांकि उन्होंने कहा कि एक महिला होने का भी उन्हें काफी फायदा मिला.

HS news की एग्जिक्यूटिव एडिटर

बिहार की रहने वाली प्रतिभा ज्योति ने बताया कि जामिया आने से लगता है मानो मैं अपने घर में आ गई हूं. साथ ही उन्होंने बताया कि महिलाओं से जुड़ा मुद्दा उन्हें हमेशा की खींचता था. महिलाओं और बच्चियों पर हुए अत्याचार को उन्होंने हमेशा देखा और इसी के चलते वो पत्रिकारिता के क्षेत्र में आईं. उन्होंने पर्यावरण को लेकर कहा कि छोटे छोटे प्रयास बड़े योगदान बन जाते हैं. पर्यावरण को बचाने लिए कोशिश करें और योगदान दें .

पौधों को बच्चों की तरह पालें

इस कार्यक्रम में शामिल जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति प्रोफसर नजमा अख्तर ने कहा कि पौधारोपण का ये कार्यक्रम ऐसे ही नहीं हो रहा है. इन पौधों को हम अपने बच्चों की तरह पालेंगे. यही नहीं यहां लगे जितने भी पौधे हैं उनका भी संरक्षण किया जाएगा.

99 सालों के इतिहास में पहली महिला कुलपति हैं नजमा

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के 99 सालों के इतिहास में प्रोफेसर नजमा अख्तर पहली महिला कुलपति बनी हैं. प्रो अख्तर, जामिया ही नहीं दिल्ली स्थित किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति बनी हैं. अपने चार दशक से ज्यादा के करियर में नजमा अख्तर शिक्षा क्षेत्र के कई अहम पदों पर रही हैं.

अलीगढ़ से बॉटनी में एमएससी की गोल्ड मेडलिस्ट नजमा ने अपना करियर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से ही शुरू किया. फिर सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़ते हुए वो यहां तक पहुंचीं.

नजमा के परिवार में ज्यादातर लोगों ने उच्च शिक्षा हासिल की है. उनके भाई जावेद उस्मानी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सचिव रह चुके हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में भी चीफ सेक्रेटरी भी रहे हैं.

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