धूमधाम से निकली जगन्नाथ रथयात्रा, श्रद्धालुओं ने की पुष्प वर्षा…

ऋषिकेश,13 अक्टूबर
इस वर्ष भी शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को मुनिकी रेती के कैलाश गेट स्थित मधुबन आश्रम से नगर में भव्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया गया. मधुबन आश्रम की ओर से निकाली गई भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान हरे रामा हरे कृष्णा के भजन के साथ ऋषिकेश तीर्थ नगरी पूरी तरह से भगवान जगन्नाथ के रंग में रंगी नजर आई. नगर क्षेत्र में श्रद्धालुओं और विभिन्न संस्थाओं ने रथ यात्रा का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया.

मधुबन आश्रम मुनिकी रेती के तत्वावधान पिछले कई वर्षों से नगर में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का भव्य आयोजन करता आ रहा है. मंदिर परिसर से यात्रा को दोपहर उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल तथा पौडी क्षेत्र के सांसद तीरथ सिंह रावत ने विधिवत पूजा अर्चना के बाद रवाना किया.

आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी परमानंद दास महाराज के सानिध्य में निकली रथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्कूली छात्र-छात्राएं शामिल हुए. यात्रा में कीर्तन टोली के अतिरिक्त डांडिया करते कलाकार शोभा बढ़ा रहे थे. लक्ष्मण झूला मार्ग और हरिद्वार मार्ग पर यात्रा का गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन, व्यापार सभा ऋषिकेश व अन्य धार्मिक संस्थाओं द्वारा स्वागत कर प्रसाद वितरण किया गया. करीब तीन किलोमीटर सफर तय कर यात्रा नगर निगम परिसर में समाप्त हुई.जहां महापौर अनीता मंमगाई के नेतृत्व में निगम पार्षदों ने श्रद्वालुओं को प्रसाद वितरित किया.

यात्रा में वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष हरीश कुमार धींगड़ा, मुनिकीरेती के पूर्व पालिकाध्यक्ष मनोज द्विवेदी, संजय शास्त्री विनोद शर्मा , भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष चेतन शर्मा, ईश कुमार भुटियानी , मदन गांधी, नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष जय दत्त शर्मा, जयेंद्र रमोला, प्रमोद कुमार शर्मा,, बच्चन पोखरियाल, सूरज गुल्हाटी ,वेद प्रकाश वेदप्रकाश धींगरा, हर्ष कुमार, चंद्रवीर पोखरियाल, डीके वाष्र्णेय, आईडी जोशी,सुरेंद्र कंडवाल आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए.

शरद पूर्णिमा के महत्व के बारे में कहा जाता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है. जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं. अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है.

इस दिन प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण, धन की देवी मां लक्ष्मी और सोलह कलाओं वाले चंद्रमा की उपासना से अलग-अलग वरदान प्राप्त किए जाते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में आकाश के नीचे खीर रखने की भी परंपरा है. इस दिन लोग खीर बनाते हैं और फिर 12 बजे के बाद उसे प्रसाद के तौर पर गहण करते हैं. मान्‍यता है कि इस दिन चंद्रमा आकाश से अमृत बरसाता इसलिए खीर भी अमृत वाली हो जाती है. ये अमृत वाली खीर में कई रोगों को दूर करने की शक्ति होती है.

हिन्दुस्थान समाचार /विक्रम

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