भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू, रथ खींचने से मिलता है मोक्ष
  • भगवान जगन्नाथ का मंदिर ‘श्री जगन्नाथ पुरी’ भारत ही नहीं, बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्द है
  • भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया को जगन्नाथपुरी से शुरू होती है.

नई दिल्ली. आज से ओडिसा के पुरी में विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ यात्रा शुरू हो गई है. इस रथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश के लाखों भक्त पहुंच चुके हैं. भगवान का रथ खींचने से मोक्ष मिलता है.

ओडिसा के पुरी में मनाया जाने वाला जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव का बहुत ही अधिक महत्व है. इस रथ यात्रा को ‘गुंडीचा महोत्सव’ भी कहा जाता है.

जानिए रथ यात्रा से जुड़ी ये बातें

  • भगवान जगन्नाथ का मंदिर ‘श्री जगन्नाथ पुरी’ भारत ही नहीं, बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्द है. यह मंदिर भगवान विष्णु के आंठवे अवतार ‘श्री कृष्ण’ को समर्पित है.
  • पुरी के जगन्नाथ मंदिर भगवान विष्णु के चार धामों में से एक है, जिसे हिंदू पुराणों में ‘धरती का बैकुंठ’ कहा गया है.
  • रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को तीन अलग-अलग रथों में विराजित किया जाता है.
  • हर वर्ष ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को ‘जगन्नाथ रथ यात्रा’ का उत्सव मनाया जाता है, इससे पहले 15 दिन तक भगवान जगन्नाथ आराम करते हैं. इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा कल यानी 4 जुलाई को होगी.
  • 4 जुलाई से पुरी के एक हिस्से को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किए जाने के बाद ये पहली जगन्नाथ रथयात्रा होगी.
  • भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया को जगन्नाथपुरी से शुरू होती है. चूंकि ये रथयात्रा बहुत ही भव्य एवं विशाल होती है, इसलिए इसे देखने के लिए भारी भीड़ जमा होती है.
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है. साल में एक बार रथयात्रा के दौरान भगवान अपने भाई बहनों के साथ जगन्नाथ मंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर में रहने के लिए आते हैं.
  • गुंडिचा मंदिर यानि भगवान जगन्नाथ की मौसी के घर उनका खूब आदर सत्कार किया जाता है. भगवान यहां पूरे सात दिनों तक रहते हैं.
  • भगवान विष्णु ने पुरी में ‘पुरुषोत्तम नीलमाधव’ के रूप में अवतार लिया था और सभी के परम पूज्य देवता बन गए. भगवान जगन्नाथ का स्वरूप कबीलाई है, क्योंकि वो सबर जनजाति के इष्ट देवता हैं.
  • जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए तीन विशेष रथ बनाए जाते हैं. सबसे पहले रथ पर बलराम, दूसरे रथ पर सुभद्रा और तीसरे पर भगवान जगन्नाथ सवार होते हैं.
  • भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ नारियल की लकड़ी से बनाए जाते हैं. ये लकड़ी वजन में भी अन्य लकड़ियों की तुलना में हल्की होती है और इसे आसानी से खींचा जा सकता है.
  • भगवान जगन्नाथ के रथ का रंग लाल और पीला होता है और यह अन्य रथों से आकार में बड़ा भी होता है. ये रथ बलभद्र और सुभद्रा के रथ के पीछे होता है.

श्रीमंदिर के चारों तरफ मंगलवार से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं. पुरी आने वाले वाहनों को कड़ी जांच पड़ताल के बाद छोड़ा जा रहा है.

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