चंद्रबाबू नायडू को फिर झटका, 'प्रजा वेदिका' के बाद सीएम जगनमोहन रेड्डी ने जारी किया ये फरमान…

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्र बाबू नायडू ( Chandrababu Naidu) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. वर्तमान सीएम जगन मोहन रेड़्डी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ाते हुए उनकी सुरक्षा में कटौती की है.

‘प्रजा वेदिका’ (Praja Vedika) ढहाने के फैसले के बाद अब जगन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) ने घटाई चंद्रबाबू नायडू के परिवार की सुरक्षा में कटौती का फरमान सुनाया है.

तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू और चंद्र बाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश को मिली जेड श्रेणी की सुरक्षा को हटा लिया गया है. पूर्व मंत्री नारा लोकेश की सुरक्षा को 5+5 से घटाकर 2+2 कर दिया गया है. इसके अलावा चंद्रबाबू के परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा वापस ले ली गई है.

इससे पहले मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सोमवार को उनका बंगला ‘प्रजा वेदिका’ तोड़ने के आदेश दे दिया था. उनका घर तोड़ने की कार्रवाई बुधवार से शुरू होगी. बता दें कुछ ऐसा ही कुछ नायडू सरकार ने जगन मोहन रेड्डी के विपक्ष में रहते हुए किया था.

पिछले दिनों आम नागरिकों की तरह एयरपोर्ट पर चंद्रबाबू की तलाशी ली गई थी. इस पर तेदेपा (TDP) ने कहा था कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ ऐसा बर्ताव ठीक नहीं है.

चंद्रबाबू ने जगनमोहन रेड्डी को चिट्ठी लिखकर ‘प्रजा वेदिका’ को नेता प्रतिपक्ष का सरकारी आवास घोषित करने की मांग की थी. राज्य सरकार ने शनिवार को चंद्रबाबू नायडू के अमरावती स्थित आवास ‘प्रजा वेदिका’ को अपने कब्जे में ले लिया था.

टीडीपी ने इसे राज्य सरकार की बदले की कार्रवाई बताया था. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति कोई सद्भावना नहीं दिखाई. उनके सामान को घर से बाहर फेंक दिया गया.

टीडीपी सरकार ने ‘प्रजा वेदिका’ का निर्माण आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एपीसीआरडीए) के जरिए तत्कालीन मुख्यमंत्री आवास के रूप में किया था. 5 करोड़ रुपये में बने इस आवास का इस्तेमाल चंद्रबाबू आधिकारिक कार्यों के साथ ही पार्टी की बैठकों के लिए करते थे.

नायडू ने इसी महीने के शुरू में सीएम जगनमोहन को पत्र लिखकर इस मकान का उपयोग बैठकों के लिए करने देने की इजाजत मांगी थी. चंद्रबाबू ने सरकार से आग्रह किया था कि वो इसे नेता प्रतिपक्ष का आवास घोषित कर दिया जाए लेकिन सरकार ने शुक्रवार को ‘प्रजा वेदिका’ को अपने कब्जे में लेने का निर्णय लिया. सरकार ने घोषणा की थी कि वहां पर कलेक्टरों का सम्मेलन होगा.

सोमवार को जगन सरकार ने चंद्रबाबू के कार्यकाल में बनी शासकीय इमारत ‘प्रजा वेदिका’ को गिराने का आदेश दिया था. सीएम ने कहा था कि इमारत नियमों के खिलाफ है और इसे बनाने में भ्रष्टाचार हुआ था.

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