ISHRAT JAHAN ENCOUNTER- डीजी वंजारा और एनके अमीन बरी…

नई दिल्ली. इशरत जहां कथित फर्जी ‘एनकाउंटर’ केस में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व पुलिस अधिकारियों डीजी वंजारा और एनके अमीन को सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

इस फैसले के बाद वंजारा का पक्ष रखने वाले विनोद गज्जर ने कहा, ”कोर्ट के आदेश से पता चलता है कि ये एनकाउंटर वास्तविक था.” दोनों ने कोर्ट में उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई को खत्म करने की अर्जी दी थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.

इशरत जहां कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सेवानिवृत्त पुलिस अफसरों डीजी वंजारा और एन के अमीन ने अदालत से अनुरोध किया था कि राज्य सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की सीबीआई को मंजूरी नहीं दी है, जो CRPC की धारा 197 के तहत जरूरी है. लिहाजा उनके खिलाफ मामले की सुनवाई को बंद किया जाए.

विशेष न्यायाधीश जे के पांड्या ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन के लिए मंजूरी के अभाव में दोनों पूर्व अधिकारियों को मामले से छुट्टी दी जा रही है.

गुजरात सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी थी. अदालत ने 16 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी और आदेश सुनाने के लिए सोमवार का दिन तय किया था.

इशरत जहां के कथित मुठभेड़ मामले में दोनों सेवानिवृत्त अधिकारी आरोपी थे. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि राज्य सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन चलाने की CBI को मंजूरी नहीं दी है, जो CRPC की धारा 197 के तहत जरूरी है. लिहाजा उनके खिलाफ मामले की सुनवाई को बंद किया जा सकता है.

सीआरपीसी की धारा 197 के तहत ड्यूटी के दौरान की गई कार्रवाई के लिए लोक सेवक पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी लेना जरूरी है. कोर्ट ने पहले इसी मामले में आरोप मुक्त करने का अनुरोध करने वाली उनकी अर्जियों को खारिज कर दिया था.

क्या है इशरत जहां केस- 15 जून, 2004 को गुजरात पुलिस ने एक एनकाउंटर में चार लोगों को मार गिराया. इनमें इशरत जहां, जावेद गुलाम शेख, अमजद अली राना और जीशान जौहर का नाम शामिल है. इस एनकाउंटर की अगुवाई डीआईजी डीजी वंजारा ने की थी.

7 सितंबर, 2009 को एनकाउंटर पर विवाद के बाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एसपी तमांग को जांच सौंपी गई. उन्होंने 243 पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी. इसमें इशरत जहां एनकाउंटर को फर्जी करार दिया गया. पुलिस को कोल्ड ब्लडेड मर्डर का दोषी ठहराया गया था.

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